लकड़ी माफिया का तांडव: वन विभाग की मिलीभगत से हजारों पेड़ों का कत्लेआम, मुख्यमंत्री से गुहार
पर्यावरण संरक्षण के दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक तरफ जहां प्रदेश की योगी सरकार 'एक पेड़ माँ के नाम' और 'वृक्षारोपण महाअभियान' जैसे मिशन के जरिए उत्तर प्रदेश को हरा-भरा बनाने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर बीकेटी क्षेत्र में वन विभाग के अधिकारियों और लकड़ी माफियाओं के गठजोड़ ने हरे-भरे जंगलों और बागों को 'रेगिस्तान' में तब्दील करना शुरू कर दिया है।
lucknow
2:48 PM, Apr 30, 2026
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वन विभाग की मिलीभगत से हजारों पेड़ों का कत्लेआम सौ0
बक्शी का तालाब। के विधानसभा क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक तरफ जहां प्रदेश की योगी सरकार 'एक पेड़ माँ के नाम' और 'वृक्षारोपण महाअभियान' जैसे मिशन के जरिए उत्तर प्रदेश को हरा-भरा बनाने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर बीकेटी क्षेत्र में वन विभाग के अधिकारियों और लकड़ी माफियाओं के गठजोड़ ने हरे-भरे जंगलों और बागों को 'रेगिस्तान' में तब्दील करना शुरू कर दिया है।
स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि, इटौंजा, माधवपुर, अर्जुनपुर, कठवारा, बिनधौरा, लोधवली, भगवतपुर, अमानीगंज और राजापुर सहित दर्जनों गांवों में माफियाओं ने अपना जाल बिछा रखा है। यहाँ आम, नीम, शीशम और गूलर जैसी प्रतिबंधित प्रजातियों के हजारों पेड़ों को दिनदहाड़े काटा जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि, यह कत्लेआम वन विभाग की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन विभाग ने पूरी तरह से अपनी आंखें मूंद ली हैं।
शिकायतकर्ता दीपक शुक्ला और तिरंगा महाराज ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उनका आरोप है कि, स्थानीय वन दरोगा और अन्य अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर कटान संभव ही नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी अवैध कटान की सूचना दी जाती है, विभाग के अधिकारी केवल 'जुर्माना' लगाने की रस्म अदायगी कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं, जबकि पर्दे के पीछे लाखों रुपये का काला कारोबार फल-फूल रहा है।
शिकायत के अनुसार, माफियाओं की कुल्हाड़ी सूरजपुर, महिंगवा, कुम्हरावा, गढ़ा, मरपा और धर्मपुर जैसे इलाकों में भी चल रही है। स्थिति इतनी भयावह है कि पूरे के पूरे आम के बाग साफ कर दिए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद माफियाओं के खिलाफ कोई सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं और वे अब बचे हुए पेड़ों को भी काटने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री के 'मिशन लाइफ' और मुख्यमंत्री के पर्यावरण संरक्षण संकल्प को बीकेटी के ये भ्रष्ट अधिकारी ठेंगा दिखा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध धंधे को नहीं रोका गया, तो क्षेत्र की हरियाली पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, जिससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ना तय है।
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी वन अधिकारियों व लकड़ी माफियाओं के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान में आने के बाद, क्या प्रशासन इन 'पर्यावरण के दुश्मनों' पर लगाम कस पाता है या भ्रष्टाचार की कुल्हाड़ी इसी तरह हरियाली को काटती रहेगी।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर