मेट्रो में तड़पता रहा विवेक,नहीं मिला इलाज; बहनोई ने मेट्रो कर्मियों को ठहराया जिम्मेदार
गाजीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रूट पर सफर कर रहे एक 33 वर्षीय युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने मेट्रो प्रशासन पर इलाज में देरी और घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि समय रहते मेडिकल सहायता मिल जाती, तो युवक की जान बचाई जा सकती थी।
lucknow
4:17 PM, May 5, 2026
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लखनऊ मेट्रो में लापरवाही की भेंट चढ़ी एक जान सौ0 bma7.in
लखनऊ। गाजीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रूट पर सफर कर रहे एक 33 वर्षीय युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने मेट्रो प्रशासन पर इलाज में देरी और घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि समय रहते मेडिकल सहायता मिल जाती, तो युवक की जान बचाई जा सकती थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अलीगंज स्थित शेखूपुरा के निवासी 33 वर्षीय विवेक सिंह बंथरा स्थित एक निजी बीज कंपनी में अकाउंटेंट और स्टोर इंचार्ज के पद पर कार्यरत थे। विवेक के बहनोई पंकज सिंह ने बताया कि विवेक का रोज का नियम था कि वह काम के बाद मेट्रो से ही सफर करते थे। सोमवार को भी वह अपनी ड्यूटी खत्म कर शाम करीब 5:30 बजे मेट्रो से घर के लिए निकले थे। उन्हें आईटी चौराहा स्टेशन पर उतरकर वहां से घर के लिए अन्य वाहन पकड़ना था।
शाम करीब 7:00 बजे विवेक के परिवार के पास राम मनोहर लोहिया अस्पताल से एक फोन आया, जिसने परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं। अस्पताल प्रशासन ने सूचना दी कि विवेक को मेट्रो स्टेशन से मरणासन्न हालत में यहां लाया गया है। आनन-फानन में परिजन अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने विवेक को 'ब्रॉट डेड' (मृत घोषित) कर दिया।बताया जा रहा है कि मेट्रो के गार्ड्स ने विवेक को ट्रेन की सीट पर अचेत और मरणासन्न हालत में पड़े देखा था। इसके बाद उन्होंने एम्बुलेंस बुलवाई और उन्हें लोहिया अस्पताल भिजवाया। विवेक के पास मिले मोबाइल फोन के जरिए ही उनके परिजनों से संपर्क साधा जा सका।
मृतक के बहनोई पंकज सिंह ने मेट्रो प्रबंधन पर तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि, मेट्रो के हर स्टेशन पर प्राथमिक चिकित्सा और डॉक्टर की उपलब्धता का दावा किया जाता है, लेकिन विवेक के मामले में उन्हें स्टेशन पर तत्काल कोई इलाज क्यों नहीं मिला। गार्ड्स द्वारा विवेक को देखे जाने और उन्हें अस्पताल पहुँचाने के बीच के समय में मेट्रो प्रशासन ने स्वयं कोई इमरजेंसी मेडिकल रिस्पॉन्स क्यों नहीं दिया।परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते मेट्रो के भीतर ही उन्हें ऑक्सीजन या प्राथमिक उपचार मिल जाता, तो शायद परिणाम कुछ और होता।
विवेक सिंह अपने परिवार का एक मजबूत स्तंभ थे। उनके परिवार में पिता गुलाब सिंह, मां सरोज देवी और दो भाई (एक बड़ा और एक छोटा भाई तुषार सिंह) हैं। विवेक की अभी शादी नहीं हुई थी और हाल ही में उनके रिश्ते के लिए बातचीत चल रही थी। बेटे की मौत की खबर सुनते ही घर में कोहराम मच गया है और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
गाजीपुर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों (जैसे हार्ट अटैक या अन्य कोई कारण) का पता चल सकेगा। वहीं, मेट्रो प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है कि, आपातकालीन स्थिति में उनके 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' का पालन किया गया या नहीं।यह घटना उन हजारों यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा करती है जो हर दिन मेट्रो पर भरोसा करते हैं।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर