खनन माफिया का आतंक: उजाड़े जा रहे खेत और तालाब, प्रशासन की चुप्पी पर सुलगते सवाल
बख्शी का तालाब में इन दिनों विकास की नहीं, बल्कि विनाश की धूल फांक रहा है। क्षेत्र के रुदही गवा, भोरुमाऊ, और पलहरी जैसे दर्जनों गांवों में अवैध मिट्टी खनन का काला कारोबार अपनी जड़ें इतनी गहरी जमा चुका है कि अब यह न केवल कानून व्यवस्था, बल्कि आम जनजीवन और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है। शासन के कड़े निर्देशों के बावजूद, बीकेटी में खनन माफिया बेखौफ होकर धरती का सीना चीर रहे हैं।
lucknow
6:26 PM, May 5, 2026
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रुदही गवा तालाब के पास डंप हुई मिट्टी सौ0 bma7.in
बख्शी का तालाब में इन दिनों विकास की नहीं, बल्कि विनाश की धूल फांक रहा है। क्षेत्र के रुदही गवा, भोरुमाऊ, और पलहरी जैसे दर्जनों गांवों में अवैध मिट्टी खनन का काला कारोबार अपनी जड़ें इतनी गहरी जमा चुका है कि अब यह न केवल कानून व्यवस्था, बल्कि आम जनजीवन और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है। शासन के कड़े निर्देशों के बावजूद, बीकेटी में खनन माफिया बेखौफ होकर धरती का सीना चीर रहे हैं।
बख्शी का तालाब के रुदही के स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि, खनन माफियाओं ने गांव के सरकारी तालाब के पास दर्जनों डंपर मिट्टी का अवैध भंडारण कर रखा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मिट्टी रात के सन्नाटे में आसपास के खेतों से अवैध रूप से खोदकर लाई गई है।ग्रामीणों ने बताया, जब हम विरोध करते हैं, तो माफिया के गुर्गे डराते-धमकाते हैं। तालाब के पास मिट्टी डंप होने से जल स्रोत बंद हो रहे हैं और बरसात में गांव में पानी भरने का खतरा बढ़ गया है। माफियाओं ने न केवल खेतों को तालाब बना दिया है, बल्कि अब असली तालाबों के अस्तित्व को भी संकट में डाल दिया है।
सड़कों का हाल यह है कि, यहाँ चलना अब किसी चुनौती से कम नहीं। मिट्टी से लदे ओवरलोड डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़कों पर बिना ढके तेज रफ्तार में दौड़ते हैं।ओवरलोडिंग के कारण सड़कें जगह-जगह से धंस गई हैं। बाइक सवार और साइकिल सवार इन डंपरों के पास से गुजरने में कतराते हैं। पिछले कुछ महीनों में यहाँ अवैध परिवहन के कारण दर्जनों छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं।डंपरों से गिरने वाली मिट्टी सड़कों पर परत की तरह जमा हो गई है, जो वाहनों के गुजरने पर धूल का ऐसा गुबार पैदा करती है कि सामने का रास्ता दिखना बंद हो जाता है। इससे राहगीरों की आंखों में जलन और सांस की समस्या पैदा हो रही है।
पर्यावरणविदों ने बख्शी का तालाब में हो रहे इस खनन पर गहरी चिंता जताई है। विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी की ऊपरी परत को हटा देने से जमीन की उर्वरकता पूरी तरह खत्म हो जाती है।जिस गहराई तक बख्शी का तालाब में खुदाई की जा रही है, उससे क्षेत्र का वॉटर लेवल नीचे जा सकता है।तालाबों और जल निकायों के पास डंपिंग से स्थानीय जलीय जीवन नष्ट हो रहा है। धूल के कारण आसपास की फसलों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। पौधों के पत्तों पर धूल जमा होने से उनकी प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित हो रही है, जिससे पैदावार घट रही है।
क्षेत्रीय विधायक योगश शुक्ला और स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। हाल ही में बख्शी का तालाब ने शासन को पत्र लिखकर अवैध खनन की शिकायत की थी। हालांकि, एसडीएम बख्शी का तालाब साहिल कुमार के नेतृत्व में समय-समय पर छापेमारी कर डंपरों को सीज किया गया है। लेकिन माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत है कि अधिकारी के जाते ही खुदाई फिर शुरू हो जाती है।
अधिकारियों ने बताया है कि,रुदही गवा और आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन और डंपिंग की शिकायतें मिली हैं। राजस्व विभाग और पुलिस की एक संयुक्त टीम गठित कर दी गई है। जो भी डंपर या जेसीबी अवैध रूप से चलती पाई जाएगी, उसे तुरंत सीज किया जाएगा और माफियाओं पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।खनन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। अवैध भंडारण के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है। रुदही गवा तालाब के पास जमा मिट्टी की जांच की जाएगी और यदि यह अवैध पाई गई, तो संबंधित भू-स्वामी और माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
जनता का सवाल सीधा है—जब सरकार का जीरो टॉलरेंस का दावा है, तो माफिया इतने निडर कैसे हैं? ग्रामीण इलाकों में उड़ती धूल, टूटती सड़कें और खतरे में पड़ते तालाब गवाही दे रहे हैं कि, कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है।यदि तत्काल सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब बीकेटी की उपजाऊ भूमि केवल गहरे गड्ढों और बंजर मैदानों में तब्दील हो जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के बावजूद निचले स्तर के कर्मचारियों की 'सांठगांठ' इस अवैध कारोबार को ऑक्सीजन दे रही

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर