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धर्म/न्यूज़/historic decision of himachal high court the money of the temple belongs to the deity not to the government

हिमाचल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: "मंदिर का पैसा देवता का है, सरकार का नहीं"

। हाईकोर्ट ने मंदिरों के चढ़ावे और दान के उपयोग को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है, जो पूरे देश के लिए एक नजीर बन सकता है। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि "मंदिर का धन देवता का है, सरकार का नहीं।अदालत ने अपने 38 पन्नों के आदेश में राज्य सरकार को मंदिर के फंड को सरकारी खजाने की तरह इस्तेमाल करने से पूरी तरह रोक दिया है।

himachal pradesh

7:29 PM, May 5, 2026

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हिमाचल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: "मंदिर का पैसा देवता का है, सरकार का नहीं"
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मंदिर के चढ़ावे पर सरकार का अधिकार खत्म सौ0 bma7.in

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हिमाचल प्रदेश। हाईकोर्ट ने मंदिरों के चढ़ावे और दान के उपयोग को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है, जो पूरे देश के लिए एक नजीर बन सकता है। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि "मंदिर का धन देवता का है, सरकार का नहीं।अदालत ने अपने 38 पन्नों के आदेश में राज्य सरकार को मंदिर के फंड को सरकारी खजाने की तरह इस्तेमाल करने से पूरी तरह रोक दिया है। कोर्ट के अनुसार, जब भक्त दान देते हैं, तो उनका विश्वास होता है कि यह पैसा भगवान की सेवा और धर्म के प्रचार में लगेगा। सरकार द्वारा इस पैसे का अन्य कार्यों में उपयोग करना उस 'जन-विश्वास' का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट ने उन कार्यों की लंबी सूची दी है जहाँ अब मंदिर का पैसा खर्च नहीं किया जा सकेगा।सड़कों, पुलों या सरकारी इमारतों के निर्माण में इस राशि का उपयोग वर्जित है।राज्य सरकार अपनी किसी भी कल्याणकारी योजना के लिए मंदिर निधि का उपयोग नहीं कर सकती।मंदिर ट्रस्ट के पैसों से अधिकारियों या कमिश्नर के लिए वाहन खरीदना या उनके निजी खर्चे उठाना प्रतिबंधित है। मंदिर में आने वाले वीआईपी मेहमानों के लिए उपहार, स्मृति चिह्न या तस्वीरों पर होने वाला खर्च अब बंद होगा।किसी भी निजी व्यवसाय, मॉल या होटल में मंदिर के पैसे का निवेश नहीं किया जा सकेगा।

अदालत ने निर्देश दिया कि, चढ़ावे की पाई-पाई केवल विग्रहों की सेवा और मंदिर परिसर की साफ-सफाई और वैदिक शिक्षा, संस्कृत पाठशालाओं और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देना।गौशालाओं का संचालन, लंगर और असहायों की सेवा और हिंदू धर्म से जुड़ी कला और संस्कृति का संरक्षण जैसे इन कार्यों में लगनी चाहिए।

भ्रष्टाचार रोकने के लिए कोर्ट ने 'पारदर्शिता' को अनिवार्य बना दिया है। हर मंदिर को अपनी मासिक आय और खर्च का विवरण नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सार्वजनिक करना होगा।यदि कोई ट्रस्टी या अधिकारी फंड का दुरुपयोग करता पाया गया, तो वह राशि सीधे उससे वसूली जाएगी और उस पर 'आपराधिक विश्वासघात'का मामला चलेगा।

भारत में लंबे समय से यह बहस रही है कि सरकारें केवल हिंदू मंदिरों के फंड पर नियंत्रण क्यों रखती हैं, जबकि अन्य धार्मिक स्थलों को स्वायत्तता प्राप्त है। हिमाचल हाईकोर्ट का यह फैसला इस दिशा में एक बड़ा कदम है, जो स्थापित करता है कि सरकार केवल एक संरक्षक है, मालिक नहीं।यह फैसला न केवल मंदिरों में पारदर्शिता लाएगा, बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि, भक्तों की श्रद्धा का दुरुपयोग राजनीतिक या प्रशासनिक लाभ के लिए न हो सके।

मुस्कान सिंह

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मुस्कान सिंह

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