नितिन गडकरी का बड़ा बयान: पेट्रोल-डीजल गाड़ियों का कोई भविष्य नहीं
भारतीय सड़कों से बहुत जल्द पेट्रोल और डीजल की गंध और इंजनों का शोर गायब होने वाला है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र के भविष्य को लेकर अब तक का सबसे स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। नई दिल्ली में आयोजित 'बसवर्ल्ड कॉन्क्लेव 2026' में बोलते हुए गडकरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि पारंपरिक ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर चलने वाली गाड़ियों का अब कोई भविष्य नहीं बचा है और इ
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1:09 PM, Apr 29, 2026
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पेट्रोल-डीजल का युग समाप्त photo by - ( edited ) google
नई दिल्ली। भारतीय सड़कों से बहुत जल्द पेट्रोल और डीजल की गंध और इंजनों का शोर गायब होने वाला है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र के भविष्य को लेकर अब तक का सबसे स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। नई दिल्ली में आयोजित 'बसवर्ल्ड कॉन्क्लेव 2026' में बोलते हुए गडकरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि पारंपरिक ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर चलने वाली गाड़ियों का अब कोई भविष्य नहीं बचा है और इनका दौर धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में दर्ज होने की ओर बढ़ रहा है।
नितिन गडकरी ने वाहन निर्माता कंपनियों को संबोधित करते हुए चेतावनी भरे लहजे में कहा कि,अब समय आ गया है जब कंपनियों को अपनी तकनीक और उत्पादन की दिशा पूरी तरह बदल लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, "खेल अब पूरी तरह बदलने वाला है। मैं ऑटोमोबाइल सेक्टर से अपील करता हूं कि वे जल्द से जल्द बायोफ्यूल और वैकल्पिक ईंधनों की ओर शिफ्ट हो जाएं।" गडकरी का यह बयान संकेत देता है कि सरकार आने वाले समय में जीवाश्म ईंधन पर चलने वाले वाहनों के खिलाफ और भी सख्त नीतियां अपना सकती है।
मंत्री ने इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता भारी बोझ बताया। भारत वर्तमान में अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। गडकरी ने चिंता जताते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल के आयात पर खर्च होने वाला लाखों-करोड़ों रुपया देश की आर्थिक सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। यदि यह पैसा देश के भीतर बायोफ्यूल के उत्पादन में लगे, तो इसका सीधा लाभ भारतीय किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा। उनके विजन के अनुसार, "प्रदूषण मुक्त भारत" और "आत्मनिर्भर भारत" एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
आर्थिक कारणों के अलावा, गडकरी ने पर्यावरण के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल न केवल महंगे हैं, बल्कि ये देश के लिए एक गंभीर पर्यावरणीय संकट भी बन चुके हैं। जहरीले धुएं से बिगड़ती हवा की गुणवत्ता और ग्लोबल वार्मिंग के खतरों को देखते हुए क्लीन एनर्जी (एथेनॉल, मेथनॉल, बायो-CNG, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक) को अपनाना अब पसंद नहीं बल्कि मजबूरी बन चुका है।
गडकरी ने केवल चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि समाधान भी पेश किया। उन्होंने एथेनॉल-मिश्रित ईंधन, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों की वकालत करते हुए कहा कि ये विकल्प न केवल सस्ते हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। उनका मानना है कि आने वाले समय में बसें, ट्रक और कारें पूरी तरह से स्वदेशी और प्रदूषण मुक्त ईंधनों पर चलेंगी, जिससे आम आदमी का सफर भी किफायती होगा।
नितिन गडकरी के इस बयान ने ऑटोमोबाइल जगत में हलचल पैदा कर दी है। यह साफ है कि, भारत सरकार अब परिवहन के पुराने ढर्रे को बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है। पेट्रोल-डीजल के दिन अब गिनती के रह गए हैं, और देश एक 'ग्रीन मोबिलिटी' के युग की ओर कदम बढ़ा चुका है। जो कंपनियां समय के साथ खुद को नहीं बदलेंगी, उनके लिए आने वाला बाजार बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाला है।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर