लखनऊ में कुदरत का कहर: आंधी में गिरे पेड़ के नीचे दबकर कैंसर संस्थान के रेडियो थेरेपिस्ट की मौत
कैंट इलाके में गुरुवार सुबह आए कुदरत के कहर ने एक होनहार युवक की जान ले ली। तेज आंधी के दौरान एक विशालकाय पेड़ गिरने से बाइक सवार रेडियो थैरेपिस्ट उसकी चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद साथी गंभीर रूप से घायल हो गए।
lucknow
4:27 PM, Apr 30, 2026
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आंधी में गिरे पेड़ के नीचे दबकर कैंसर संस्थान के रेडियो थेरेपिस्ट की मौत सौ0 bma7.in
लखनऊ। के कैंट इलाके में गुरुवार सुबह आए कुदरत के कहर ने एक होनहार युवक की जान ले ली। तेज आंधी के दौरान एक विशालकाय पेड़ गिरने से बाइक सवार रेडियो थैरेपिस्ट उसकी चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद साथी गंभीर रूप से घायल हो गए।
बस्ती जिले के दुबरा बोधी गांव निवासी 28 वर्षीय रवि शंकर पांडे सुल्तानपुर रोड स्थित चक गजरिया स्थित कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान में रेडियो थैरेपिस्ट के पद पर कार्यरत थे। रवि शंकर वर्तमान में लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल परिसर में रह रहे थे। गुरुवार सुबह करीब 8:00 बजे वह अपने साथी बालकृष्ण, जो मऊ जिले के रहने वाले हैं, के साथ अपनी बाइक से ड्यूटी के लिए अस्पताल जा रहे थे।
मौके पर मौजूद लोगो के मुताबिक, जब दोनों कैंट के दिलकुशा इलाके से गुजर रहे थे, तभी अचानक मौसम का मिजाज बिगड़ गया। तेज रफ्तार आंधी के कारण सड़क किनारे लगा एक पुराना पेड़ अचानक उखड़कर उनकी बाइक पर गिर गया। पेड़ इतना भारी था कि दोनों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे उसके भारी तने के नीचे दब गए। राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस और स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद पेड़ को हटाकर दोनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक रवि शंकर की सांसें थम चुकी थीं। बालकृष्ण को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रवि शंकर के पिता शिवनारायण पांडे, जो पेशे से वकील हैं, ने बताया कि, उनका बेटा मिलनसार और मेहनती था। रवि शंकर अभी अविवाहित थे। उनके परिवार में मां इंद्रावती और एक बड़ा भाई आनंद है। बेटे की मौत की खबर सुनते ही घर में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
इस घटना ने एक बार फिर मानसून और आंधी के दौरान सड़कों के किनारे लगे पुराने और कमजोर पेड़ों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि, कैंट और दिलकुशा जैसे इलाकों में कई पेड़ जर्जर स्थिति में हैं, जो राहगीरों के लिए खतरा बने हुए हैं। प्रशासन को समय रहते ऐसे पेड़ों की छंटाई या पहचान करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर