पीला सोना लूट रहे खनन माफिया: एनएच-30 पर बेखौफ दौड़ते डंपर और प्रशासन की 'मौन' सहमति
बख्शी का तालाब की तहसील इन दिनों विकास की नहीं, बल्कि विनाश की एक गुप्त पटकथा लिख रही है। जहाँ एक तरफ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत अपराधियों पर नकेल कसने का दावा करती है, वहीं बीकेटी में राष्ट्रीय राजमार्ग 30 (NH-30) पर रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक दौड़ते अवैध डंपर शासन-प्रशासन के इन दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
lucknow
1:35 PM, May 6, 2026
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एनएच-30 पर बेखौफ दौड़ते डंपर और प्रशासन की 'मौन' सहमति सौ0 bma7.in
बख्शी का तालाब की तहसील इन दिनों विकास की नहीं, बल्कि विनाश की एक गुप्त पटकथा लिख रही है। जहाँ एक तरफ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत अपराधियों पर नकेल कसने का दावा करती है, वहीं बीकेटी में राष्ट्रीय राजमार्ग 30 (NH-30) पर रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक दौड़ते अवैध डंपर शासन-प्रशासन के इन दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि,बख्शी का तालाब तहसील के अंतर्गत आने वाले गांवों और राजमार्ग के आसपास के इलाकों में अवैध खनन का खेल किसी छिपकर चलने वाली गतिविधि जैसा नहीं रह गया है। स्थानीय लोगों और हालिया ग्राउंड रिपोर्ट्स के अनुसार, खनन माफिया इतने बेखौफ हैं कि वे 24 घंटे सक्रिय रहने वाले महकमों की आंखों के सामने से सरकारी राजस्व में सेंध लगा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि, क्या यह दुस्साहस बगैर पुलिसिया शह के संभव है?इलाके के ग्रामीण दबी जुबान में बताते हैं कि जब भी कोई बड़ी कार्रवाई की भनक लगती है, माफियाओं को पहले ही सूचना मिल जाती है। डंपर और जेसीबी मशीनें गायब हो जाती हैं और जैसे ही अधिकारी वापस मुड़ते हैं, फिर से खुदाई शुरू हो जाती है। यह 'चोर-सिपाही' का खेल नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित सिंडिकेट की ओर इशारा करता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग 30 (NH-30) पर हर रोज सैकड़ों की संख्या में मिट्टी और बालू से लदे डंपर अवैध रूप से गुजरते हैं। नियमतः खनन के लिए विभाग से अनुमति और रॉयल्टी का भुगतान अनिवार्य है, लेकिन ,बख्शी का तालाब में मानकों को ताक पर रखकर गहरे गड्ढे किए जा रहे हैं।भौरूमऊ, पाल्हरी और फर्रुखाबाद जैसे गांवों में कृषि भूमि को 20 फीट गहरे गड्ढों में तब्दील कर दिया गया है। ये गड्ढे न केवल जमीन की उर्वरता खत्म कर रहे हैं, बल्कि बारिश के दिनों में जानलेवा साबित होते हैं। एलडीए (लखनऊ विकास प्राधिकरण) की प्रस्तावित 'नैमिष नगर' टाउनशिप की अधिग्रहित जमीन पर भी माफियाओं की नजर है। प्राधिकरण की जमीन से चुपचाप मिट्टी निकाल कर बेची जा रही है।
तहसील प्रशासन समय-समय पर छापेमारी की खबरें देता है। मार्च 2026 में एसडीएम बीकेटी साहिल कुमार के नेतृत्व में 6 डंपरों को जब्त करने और एफआईआर दर्ज करने जैसी कार्रवाई हुई, लेकिन ये कदम 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हो रहे हैं। एक तरफ अधिकारी डंपर सीज करते हैं, दूसरी तरफ अगली रात फिर से उसी रफ्तार से खनन शुरू हो जाता है।हाल ही में भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष अतुल मिश्रा ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि खनन माफिया सरकारी प्रोजेक्ट्स के वर्क ऑर्डर की आड़ में बाजार में मिट्टी बेच रहे हैं और एनजीटी के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
24 घंटे सेवा में तत्पर रहने वाले पुलिस और राजस्व विभाग की "नजरें इनायत" के बिना इतना बड़ा अवैध कारोबार संभव नहीं है। बख्शी का तालाब की सड़कें आज डंपरों के ओवरलोड वजन से टूट रही हैं, ग्रामीण धूल और शोर से परेशान हैं, और सरकार का खजाना खाली हो रहा है।स्थानीय निवासियों का कहना है कि, जब तक थाना स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी और "कमीशन" का यह खेल बंद नहीं होगा, तब तक माफिया इसी तरह बेखौफ रहेंगे। सरकार को चाहिए कि, वह न केवल डंपर चालकों पर, बल्कि उन 'सफेदपोशों' और भ्रष्ट अधिकारियों पर भी कार्रवाई करे जो इन माफियाओं की ढाल बने हुए हैं।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर