बीकेटी, सैरपुर और इटौंजा में खनन माफिया बेखौफ, राजस्व विभाग को लग रहा करोड़ों का चूना
बख्शी का तालाब, सैरपुर और इटौंजा थाना क्षेत्रों में इन दिनों मिट्टी खनन माफिया का बोलबाला है। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में ही नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी मिट्टी का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस अवैध खेल में माफिया न केवल उपजाऊ जमीन को छलनी कर रहे हैं, बल्कि सरकार को मिलने वाली रॉयल्टी की चोरी कर राजस्व विभाग को तगड़ा चूना भी लगा रहे हैं।
lucknow
12:43 PM, May 8, 2026
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राजस्व विभाग को लग रहा करोड़ों का चूना संकेतिक फोटो सौ0 bma7.in
लखनऊ। बख्शी का तालाब, सैरपुर और इटौंजा थाना क्षेत्रों में इन दिनों मिट्टी खनन माफिया का बोलबाला है। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में ही नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी मिट्टी का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस अवैध खेल में माफिया न केवल उपजाऊ जमीन को छलनी कर रहे हैं, बल्कि सरकार को मिलने वाली रॉयल्टी की चोरी कर राजस्व विभाग को तगड़ा चूना भी लगा रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, सैरपुर और इटौंजा के सीमावर्ती इलाकों में दर्जनों जेसीबी मशीनें और डंपर सक्रिय हैं। माफिया मुख्य रूप से उन जमीनों को निशाना बना रहे हैं जो सड़क किनारे स्थित हैं या जहाँ भविष्य में बड़ी व्यावसायिक संस्थाएं या कॉलोनियां बनने वाली हैं। सड़क किनारे बन रही इन संस्थाओं और अन्य निर्माण स्थलों पर यह 'पीली मिट्टी' बेहद महंगे दामों पर बेची जा रही है। माफिया एक डंपर मिट्टी के लिए मनमाने दाम वसूल रहे हैं, जिससे उनकी जेबें तो भर रही हैं, लेकिन आम जनता और सरकार का नुकसान हो रहा है।
खनन विभाग के नियमानुसार, किसी भी कृषि भूमि से मिट्टी निकालने की अनुमति केवल 3 से 3.5 फीट तक होती है, ताकि जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहे। लेकिन बीकेटी के भौरूमऊ, पाल्हरी और फर्रुखाबाद जैसे क्षेत्रों में हकीकत इसके उलट है। यहाँ माफियाओं ने 20 से 25 फीट गहरे गड्ढे खोद दिए हैं। ये गहरे गड्ढे न केवल पर्यावरण के लिए खतरा हैं, बल्कि भविष्य में भूस्खलन और मवेशियों व बच्चों के गिरने जैसी बड़ी दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि पुलिस थानों और तहसील कार्यालयों से कुछ ही दूरी पर यह अवैध खनन जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्रीय पुलिस और राजस्व कर्मियों की मिलीभगत के बिना यह काम संभव नहीं है। बिना किसी 'रवन्ना' (परिवहन परमिट) के सैकड़ों डंपर रोजाना सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे पीडब्ल्यूडी की सड़कें भी समय से पहले टूट रही हैं। भारी वाहनों के कारण धूल का गुबार स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है।
मई 2026 की शुरुआत में ही एसडीएम बीकेटी साहिल कुमार के नेतृत्व में कुछ स्थानों पर छापेमारी की गई थी, जिसमें कई डंपरों को सीज किया गया था। इटौंजा के सआदत नगर और चंदनापुर में भी कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, ये कार्रवाइयां केवल 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हो रही हैं। माफिया कुछ दिन काम बंद रखते हैं और प्रशासनिक ढील मिलते ही दोबारा सक्रिय हो जाते हैं।यदि समय रहते शासन ने इस संगठित माफिया गिरोह पर शिकंजा नहीं कसा, तो आने वाले समय में न केवल सरकारी राजस्व का बड़ा नुकसान होगा, बल्कि उपजाऊ कृषि भूमि भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। क्षेत्रीय निवासियों ने मुख्यमंत्री पोर्टल और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस क्षेत्र में खनन के पट्टों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध रूप से चल रहे वाहनों को तत्काल जब्त किया जाए।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर