खाकी शर्मसार ! BKT थाने में लहूलुहान कराहती रहीं बहनें, मूकदर्शक बनी रही पुलिस
बख्शी का तालाब थाना क्षेत्र से खाकी को शर्मसार करने वाली एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहाँ एक ओर सरकार 'मिशन शक्ति' जैसे अभियानों के जरिए महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा दिला रही है, वहीं बख्शी का तालाब पुलिस की कथित संवेदनहीनता ने इन दावों की पोल खोल दी है।
lucknow
1:57 PM, May 8, 2026
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शिकायत करने गई बहनों को भाई ने पीटा सौ0 bma7.in
बख्शी का तालाब। थाना क्षेत्र से खाकी को शर्मसार करने वाली एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहाँ एक ओर सरकार 'मिशन शक्ति' जैसे अभियानों के जरिए महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा दिला रही है, वहीं बख्शी का तालाब पुलिस की कथित संवेदनहीनता ने इन दावों की पोल खोल दी है।
मामला जमीन-जायदाद के बंटवारे से जुड़ा है। मिली जानकारी के अनुसार, दो बहनें अपने पत्रक संपत्ति में हिस्सेदारी और सुरक्षा की गुहार लगाने के लिए बख्शी का तालाब थाने पहुँची थीं। उन्होंने अपने भाई और उसके बेटे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन न्याय की उम्मीद में थाने पहुँची इन महिलाओं को क्या पता था कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उनके साथ बर्बरता होगी।बताया जा रहा है कि थाने से बाहर निकलते ही या थाना क्षेत्र के आसपास ही, आक्रोशित भाई ने अपने बेटे के साथ मिलकर दोनों बहनों पर जानलेवा हमला कर दिया। हमला इतना भीषण था कि, दोनों बहनें बुरी तरह लहूलुहान हो गईं। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आने के कारण वे जमीन पर गिर पड़ीं।
सबसे चौंकाने वाली और विचलित करने वाली बात तब सामने आई जब पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने किसी तरह घायल महिलाओं को वापस बख्शी का तालाब थाने पहुँचाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों बहनें लहूलुहान हालत में थाने के अंदर बने चबूतरे पर काफी देर तक पड़ी कराहती रहीं।वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि, महिलाएं खून से लथपथ हैं और दर्द से तड़प रही हैं, लेकिन थाने पर मौजूद पुलिसकर्मी उनकी सुनवाई करने या तत्काल उन्हें अस्पताल पहुँचाने की जहमत उठाते नहीं दिखे। पुलिस की इस "बड़ी लापरवाही" ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
घटना के बाद से क्षेत्र में पुलिस के खिलाफ गुस्सा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि, अगर समय रहते पुलिस ने भाई के खिलाफ सख्त कार्रवाई की होती, तो यह नौबत नहीं आती। वर्तमान में महिलाओं की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सोशल मीडिया पर भी पुलिस की इस सुस्ती की जमकर आलोचना हो रही है।अब देखना यह होगा कि, लखनऊ के उच्च पुलिस अधिकारी इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं। क्या उन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने तड़पती महिलाओं को अनदेखा किया? या फिर इसे भी महज़ एक पारिवारिक विवाद बताकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर