काकोरी में रक्षक ही बने भक्षक! 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को ठेंगा दिखा रहे बेखौफ लकड़कट्टे
काकोरी सर्किल में इन दिनों पर्यावरण संरक्षण की सरकारी कोशिशें केवल कागजों तक सिमट कर रह गई हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'एक पेड़ माँ के नाम' और 'हरित भारत' जैसे अभियानों के जरिए वनीकरण को बढ़ावा देने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर काकोरी, दुबग्गा और पारा क्षेत्रों में प्रॉपर्टी डीलरों और लकड़ी ठेकेदारों का गठजोड़ धड़ल्ले से हरे बागों पर कुल्हाड़ी चला रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि, इ
lucknow
3:12 PM, May 10, 2026
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अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा अवैध कटान सौ0 bma7.in
लखनऊ। काकोरी सर्किल में इन दिनों पर्यावरण संरक्षण की सरकारी कोशिशें केवल कागजों तक सिमट कर रह गई हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'एक पेड़ माँ के नाम' और 'हरित भारत' जैसे अभियानों के जरिए वनीकरण को बढ़ावा देने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर काकोरी, दुबग्गा और पारा क्षेत्रों में प्रॉपर्टी डीलरों और लकड़ी ठेकेदारों का गठजोड़ धड़ल्ले से हरे बागों पर कुल्हाड़ी चला रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि, इस अवैध कारोबार को रोकने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वही विभाग चुप्पी साधे बैठे हैं।
काकोरी सर्किल का इलाका कभी अपनी हरियाली और घने बागों के लिए जाना जाता था। लेकिन अब यह क्षेत्र रियल एस्टेट के लिए हॉटस्पॉट बन चुका है। विकसित होते इस इलाके में जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसका खामियाजा यहाँ के पुराने बागों को भुगतना पड़ रहा है। सूत्रों की मानें तो प्रॉपर्टी डीलिंग के इस खेल में जमीन साफ करने के लिए रातों-रात दर्जनों हरे पेड़ काट दिए जाते हैं। काकोरी सर्किल में शायद ही कोई ऐसा दिन बीतता हो, जब कहीं न कहीं अवैध कटान की आवाज न गूंजती हो।
नियमों के मुताबिक, वन विभाग और स्थानीय पुलिस दोनों की यह संयुक्त जिम्मेदारी है कि वे अवैध कटान को रोकें। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। आरोप है कि यदि कोई ईमानदार वनकर्मी तहरीर देता भी है, तो पुलिस मुकदमा दर्ज करने में आनाकानी करती है। हालिया मामला सप्ताह भर पुराना है, जहाँ काकोरी और दुबग्गा के सैदपुर बढ़ौना में बड़े पैमाने पर अवैध कटान हुआ। वनकर्मी ने तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने पाँच दिनों तक मामले को लटकाए रखा। चर्चा है कि एक लकड़कट्टे को थाने लाया भी गया, लेकिन 'ऊपर' के दबाव या आपसी साठगांठ के चलते उसे बिना किसी ठोस कार्रवाई के छोड़ दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि, जब तक पुलिस विभाग के आला अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, तब तक यह सिंडिकेट सक्रिय रहेगा। लकड़ी ठेकेदार और लकड़कट्टे किस कड़ी के जरिए पुलिस और प्रशासन के बीच अपनी पैठ बनाते हैं, यह जाँच का विषय है। पुलिस का तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज न करना और आरोपियों को संरक्षण देना सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति और प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी पर्यावरण योजनाओं को चुनौती दे रहा है।
काकोरी क्षेत्र में हो रहे इस सुनियोजित प्रकृति विनाश के खिलाफ अब स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी लामबंद हो रहे हैं। जानकारी मिली है कि लकड़ी ठेकेदारों की भूमिका और पुलिस विभाग की कथित शिथिलता के सबूतों के साथ जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस कमिश्नर और जिला वन अधिकारी (DFO) से मुलाकात करेगा।अब देखना यह होगा कि राजधानी के मुहाने पर बसे इस सर्किल में हरियाली बच पाती है या फिर भ्रष्ट तंत्र और प्रॉपर्टी डीलरों की भूख का शिकार होकर यह क्षेत्र कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो जाएगा।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर