पहाड़ों का सीना और नियमों की धज्जियां: प्रियंका गांधी के आलीशान बंगले के पीछे छिपे अनकहे विवाद
शिमला के छराबड़ा में स्थित प्रियंका गांधी वाड्रा का आलीशान बंगला एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। देवदार के घने जंगलों और शांत वादियों के बीच बना यह 'शीशमहल' केवल अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि इसे बनाने के लिए नियमों को ताक पर रखने के आरोपों के कारण भी चर्चा में रहता है। यह खबर सत्ता के रसूख, पर्यावरण की अनदेखी और दोहरे मापदंडों की एक गंभीर तस्वीर पेश करती है।
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1:12 PM, May 1, 2026
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पर्यावरण की बलि देकर बना प्रियंका का सपनों का घर सौ0 bma7.in
शिमला के छराबड़ा में स्थित प्रियंका गांधी वाड्रा का आलीशान बंगला एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। देवदार के घने जंगलों और शांत वादियों के बीच बना यह 'शीशमहल' केवल अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि इसे बनाने के लिए नियमों को ताक पर रखने के आरोपों के कारण भी चर्चा में रहता है। यह खबर सत्ता के रसूख, पर्यावरण की अनदेखी और दोहरे मापदंडों की एक गंभीर तस्वीर पेश करती है।
हिमाचल प्रदेश का सख्त कानून 'धारा 118' किसी भी बाहरी व्यक्ति को राज्य में कृषि भूमि खरीदने से रोकता है। लेकिन आरोप है कि तत्कालीन वीरभद्र सिंह सरकार ने प्रियंका वाड्रा के लिए नियमों के गलियारे खोल दिए। कहा जाता है कि सिर्फ एक व्यक्ति को जमीन दिलाने के लिए कैबिनेट की विशेष सक्रियता दिखाई गई और नियमों में रातों-रात ढील दी गई। जिस जमीन पर आम हिमाचली को घर बनाने के लिए वर्षों दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, वहां गांधी परिवार के लिए लाल कालीन बिछा दी गई।
इस बंगले के निर्माण की कहानी केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों के सीने पर हुए घावों से भी जुड़ी है। रिपोर्टों और स्थानीय दावों के अनुसार, इस निर्माण के लिए भारी ब्लास्टिंग की गई ताकि पहाड़ों को समतल किया जा सके। सबसे चौंकाने वाला आरोप 800 से अधिक कीमती देवदार और चीड़ के पेड़ों की कटाई का है। जिस लकड़ी का इस्तेमाल बंगले को 'पहाड़ी लुक' देने के लिए किया गया, वह असल में उन्हीं जंगलों की बलि देकर जुटाई गई थी, जिन्हें बचाने की कसमें आज कांग्रेस के दिग्गज नेता मंचों से खाते हैं।
स्थानीय चश्मदीदों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बंगले के निर्माण के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की भूमिका एक राज्य के मुखिया जैसी नहीं, बल्कि गांधी परिवार के प्रति समर्पित एक निष्ठावान सेवक जैसी दिखती थी। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री का प्रोटोकॉल भूलकर खड़े रहना इस बात का प्रमाण था कि हिमाचल की सत्ता का केंद्र शिमला का सचिवालय नहीं, बल्कि छराबड़ा का वह निर्माणाधीन बंगला बन गया था।
शुक्रवार को जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर लेक्चर देते हैं, तो छराबड़ा के कटे हुए पेड़ उनकी बातों पर सवालिया निशान खड़े करते हैं। एक तरफ अपने निजी सुख के लिए जंगलों और पहाड़ों को तबाह करने की छूट ली गई, वहीं दूसरी तरफ देश की सुरक्षा के लिए बनने वाले सैन्य ठिकानों और रणनीतिक बुनियादी ढांचों के विकास पर सवाल उठाए जाते हैं। यह विरोधाभास दर्शाता है कि नियम और पर्यावरण की चिंता केवल दूसरों के लिए है, खुद के 'सपनों के महल' के लिए तो विनाश भी विकास मान लिया जाता है। यह बंगला आज राजनीति में 'विशेषाधिकार' और 'दोहरेपन' का सबसे बड़ा स्मारक बनकर खड़ा है।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर