चबूतरा थियेटर फेस्टिवल: 11 जून से सजेगी बच्चों की अभिनय और नृत्य की महफिल
लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। शहर के तकरोही, इंदिरा नगर स्थित वाल्मीकि पार्क में इन दिनों बच्चों की हंसी, तालियों की गूँज और अभिनय की बारीकियों का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। 'मदर सेवा संस्थान' द्वारा संचालित 'चबूतरा थियेटर पाठशाला' ने अपनी ग्रीष्मकालीन कार्यशाला के माध्यम से न केवल बच्चों को कला से जोड़ा है, बल्कि उनके भीतर छिपे आत्मविश्वास को एक नई पहचान दी है।
lucknow
7:15 PM, Apr 26, 2026
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चबूतरा थियेटर पाठशाला का सीजन-10 बनेगा कला का महाकुंभ सौ0 bma7.in
लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। शहर के तकरोही, इंदिरा नगर स्थित वाल्मीकि पार्क में इन दिनों बच्चों की हंसी, तालियों की गूँज और अभिनय की बारीकियों का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। 'मदर सेवा संस्थान' द्वारा संचालित 'चबूतरा थियेटर पाठशाला' ने अपनी ग्रीष्मकालीन कार्यशाला के माध्यम से न केवल बच्चों को कला से जोड़ा है, बल्कि उनके भीतर छिपे आत्मविश्वास को एक नई पहचान दी है। अब यह कार्यशाला एक भव्य 'चबूतरा थियेटर फेस्टिवल (सीजन-10)' के रूप में मंच पर उतरने को तैयार है।
अक्सर माना जाता है कि, कला के लिए महंगे स्टूडियो या बड़े संस्थानों की जरूरत होती है, लेकिन मदर सेवा संस्थान ने इस धारणा को बदल दिया है। तकरोही के वाल्मीकि पार्क में खुले आसमान के नीचे लगने वाली यह 'चबूतरा पाठशाला' आज लखनऊ के बच्चों के लिए रचनात्मकता का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है। इस साल की ग्रीष्मकालीन कार्यशाला में बच्चों ने अपनी ऊर्जा और लगन से यह साबित कर दिया कि, यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो छोटे शहरों की गलियों से भी बड़े कलाकार निकल सकते हैं।संस्था की अध्यक्षा किरण लता के अनुसार, "हमारा उद्देश्य केवल बच्चों को एक्टिंग सिखाना नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। रंगमंच एक ऐसा माध्यम है जो बच्चों के संकोच को दूर करता है और उन्हें समाज के सामने अपनी बात रखने का हौसला देता है।"
कहानियों के माध्यम से अभिनय की बारीकियां सौ0 bma7.in
कहानियों के माध्यम से अभिनय की बारीकियां
कार्यशाला के मुख्य आकर्षणों में से एक रहा विख्यात रंगकर्मी महेश चंद्र देवा का मार्गदर्शन। महेश चंद्र देवा ने बच्चों को पारंपरिक किताबी ज्ञान के बजाय 'स्टोरी टेलिंग' (किस्सागोई) की अनूठी शैली से अभिनय सिखाया। उन्होंने बच्चों को जंगल की गहराइयों, जंगली जानवरों के व्यवहार और भूत-प्रेत की काल्पनिक कहानियों के संसार में ले जाकर उनके भीतर की कल्पनाशीलता को जगाया।बच्चों ने इन कहानियों को न केवल सुना, बल्कि, उनमें समाहित पात्रों को मंच पर जीवंत भी किया। शेर की दहाड़ से लेकर एक डरे हुए राही के भावों तक, बच्चों ने अभिनय की जटिल बारीकियों को खेल-खेल में आत्मसात किया। यह प्रशिक्षण सत्र बच्चों के लिए मानसिक विस्तार का एक जरिया बना, जहाँ उन्होंने सीखा कि कैसे एक अभिनेता अपनी आंखों और आवाज के उतार-चढ़ाव से दर्शकों को दूसरी दुनिया में ले जा सकता है।
अभिनय के साथ-साथ कार्यशाला में शारीरिक अनुशासन और लय पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना रजनी वर्मा ने बच्चों को नृत्य की तकनीकी बारीकियों से परिचित कराया। उन्होंने 'काउंटिंग' (गिनती) विधि का उपयोग करते हुए बच्चों को यह समझाया कि कैसे हर कदम और हर हरकत ताल के साथ बंधी होनी चाहिए।
प्रशिक्षण के दौरान शास्त्रीय नृत्य के साथ-साथ लोक गीतों और आधुनिक गीतों पर भी कड़ा अभ्यास कराया गया। रजनी वर्मा का मानना है कि नृत्य से बच्चों की एकाग्रता बढ़ती है और उनका शरीर लचीला होता है, जो एक अभिनेता के लिए अनिवार्य गुण है। कार्यशाला के अंतिम दिनों में बच्चों के भीतर जो तालमेल दिखा, वह उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है।
लय और ताल का संगम: कथक और आधुनिक नृत्य सौ0 bma7.in
सीजन-10': तीन दिवसीय नाट्य उत्सव का आगाज़
मदर सेवा संस्थान अब अपनी इस उपलब्धि को शहर के कला प्रेमियों के सामने पेश करने जा रहा है। 11 जून से 13 जून तक गोमती नगर स्थित 'अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान' के प्रेक्षागृह में 'चबूतरा थियेटर फेस्टिवल सीजन-10' का आयोजन किया जाएगा।यह उत्सव महज एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि बच्चों के तीन महीने के कड़े संघर्ष और प्रशिक्षण का उत्सव है। 10वें सीजन के इस ऐतिहासिक पड़ाव को यादगार बनाने के लिए संस्थान ने व्यापक तैयारियां की हैं।
कार्यशाला के नन्हे कलाकारों द्वारा तैयार किए गए सामाजिक और काल्पनिक नाटकों का मंचन।इस बार विशेष रूप से युवाओं द्वारा तैयार किए गए नाटकों को भी स्थान दिया गया है।व्यक्तिगत प्रतिभा को निखारने के लिए एकल नाटकों की एक विशेष श्रृंखला रखी गई है। कथक और लोक नृत्य की सामूहिक प्रस्तुतियां शाम की रौनक बढ़ाएंगी।
यह कार्यक्रम प्रतिदिन शाम 6:30 बजे से शुरू होगा। आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज को यह दिखाना है कि, यदि बच्चों को सही मंच और प्रोत्साहन मिले, तो वे न केवल अपनी संस्कृति को सहेज सकते हैं, बल्कि मनोरंजन के साथ-साथ गंभीर संदेश भी दे सकते हैं।
रंगमंच की दुनिया में 'नन्हे सितारों' की उड़ान सौ0 bma7.in
मदर सेवा संस्थान की यह पहल लखनऊ के सांस्कृतिक मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह पाठशाला उन अभिभावकों के लिए एक प्रेरणा है जो अपने बच्चों को डिजिटल स्क्रीन से दूर कर उन्हें जमीन से जुड़ी कलाओं और सामाजिक संवाद से जोड़ना चाहते हैं।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर