बीकेटी में हरियाली पर 'खूनी' आरा, वन दरोगा के बयानों में उलझा सागौन का अवैध कटान
चंद्रिका देवी मार्ग पर स्थित सरकारी ट्यूबवेल नंबर 15 के ठीक सामने बेखौफ लकड़कट्टे सागौन के हरे-भरे पेड़ों की बलि चढ़ा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि, पर्यावरण की रक्षा के लिए जिम्मेदार वन विभाग के अधिकारी ही इस पूरे प्रकरण में सवालों के घेरे में हैं।
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1:54 PM, May 6, 2026
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बख्शी का तालाब क्षेत्र में लगातार अवैध कटान सौ0 bma7.in
बख्शी का तालाब।क्षेत्र में चंद्रिका देवी मार्ग पर स्थित सरकारी ट्यूबवेल नंबर 15 के ठीक सामने बेखौफ लकड़कट्टे सागौन के हरे-भरे पेड़ों की बलि चढ़ा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि, पर्यावरण की रक्षा के लिए जिम्मेदार वन विभाग के अधिकारी ही इस पूरे प्रकरण में सवालों के घेरे में हैं।
इस अवैध कटान की सूचना मिलने पर जब जिम्मेदार वन दरोगा मुबारक अली से संपर्क किया गया, तो उनके बयानों ने विभागीय मिलीभगत की पोल खोलकर रख दी। रिपोर्ट के अनुसार, प्रातः काल जब दरोगा से कटान के संदर्भ में जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने 40 पेड़ों का परमिट होने का दावा किया। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद दोपहर में उन्होंने अपनी ही बात को पलटते हुए किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर 80 पेड़ों के कटान का परमिट बता दिया। एक ही स्थान पर, एक ही दिन में अधिकारियों के दो अलग-अलग बयान यह स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त हैं कि कटान की आड़ में बड़े पैमाने पर आंकड़ों का हेरफेर और अवैध वसूली का खेल चल रहा है।
स्थानीय सूत्रों और जानकारी के अनुसार, यह कटान अमित अरोरा नामक व्यक्ति द्वारा कराया जा रहा है। जब भी इस मामले में वन दरोगा मुबारक अली से सख्ती से पूछताछ की जाती है, तो वह कभी किसी वर्तमान मंत्री तो कभी किसी सेवानिवृत्त उच्चाधिकारी के बाग होने का हवाला देकर खुद को इस मामले से अलग कर लेते हैं। प्रभावशाली नामों का सहारा लेकर नियमों को ताक पर रखना और जांच को प्रभावित करना वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।
उत्तर प्रदेश में सागौन और शीशम जैसी कीमती प्रजातियों के पेड़ों को काटने के लिए कड़े नियम हैं। उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत, प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों को काटने के लिए न केवल ठोस अनुमति की आवश्यकता होती है, बल्कि काटे गए पेड़ों के बदले नए पौधे लगाने का शपथ पत्र भी देना होता है। लेकिन बीकेटी के इस क्षेत्र में जिस तरह से बेखौफ होकर कुल्हाड़ियां चल रही हैं, उससे स्पष्ट है कि, न तो शासन का डर है और न ही प्रशासन की निगरानी।
क्षेत्रीय जनता और पर्यावरण प्रेमियों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि, एक तरफ सरकार करोड़ों पौधे लगाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर विभाग के निचले स्तर के कर्मचारी लकड़कट्टों के साथ सांठगांठ कर पुरानी हरियाली को खत्म कर रहे हैं। इस मामले में प्रभागीय वनाधिकारी और मुख्य वन संरक्षक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है ताकि, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके और कीमती सागौन के पेड़ों को बचाया जा सके।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर