UP वक्फ बोर्ड की बड़ी कार्रवाई: 12,135 संपत्तियों का पंजीकरण रद्द
उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने और अवैध कब्जों पर लगाम लगाने के अभियान के तहत एक बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने प्रदेश भर में 12,135 वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई भारत सरकार के 'उम्मीद' पोर्टल पर दर्ज विवरणों की जांच के बाद की गई है। जांच में पाया गया कि, इन संपत्तियों के पंजीकरण में या तो गलत जानकारी दी ग
uttar pradesh
6:02 PM, Apr 26, 2026
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यूपी में 12 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण निरस्त photo by- google
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने और अवैध कब्जों पर लगाम लगाने के अभियान के तहत एक बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने प्रदेश भर में 12,135 वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई भारत सरकार के 'उम्मीद' पोर्टल पर दर्ज विवरणों की जांच के बाद की गई है। जांच में पाया गया कि, इन संपत्तियों के पंजीकरण में या तो गलत जानकारी दी गई थी या फिर अनिवार्य दस्तावेजों को अपलोड नहीं किया गया था।
केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित वक्फ संपत्ति सूचना प्रबंधन प्रणाली , जिसे 'उम्मीद' पोर्टल के नाम से भी जाना जाता है, पर देशभर की वक्फ संपत्तियों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में कुल 1.26 लाख संपत्तियां पंजीकृत हैं। सरकार का लक्ष्य इन सभी संपत्तियों का विवरण ऑनलाइन उपलब्ध कराना है ताकि, उनके प्रबंधन में होने वाली धांधली को रोका जा सके।बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, पंजीकरण निरस्त करने की प्रक्रिया उन मामलों में अपनाई गई है जहाँ संपत्तियों के मुतवल्ली (प्रबंधक) या संबंधित पक्षों ने पोर्टल पर अधूरी जानकारी भरी थी। कई मामलों में संपत्तियों की चौहद्दी (सीमाएं), क्षेत्रफल और स्वामित्व से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब थे।
लखनऊ और पश्चिमी यूपी में सर्वाधिक कार्रवाई
कार्रवाई की सबसे अधिक मार राजधानी लखनऊ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों पर पड़ी है। लखनऊ में सबसे अधिक 1,114 संपत्तियों के पंजीकरण खारिज किए गए हैं। लखनऊ ऐतिहासिक रूप से वक्फ संपत्तियों का बड़ा केंद्र रहा है, लेकिन यहाँ रिकॉर्ड में विसंगतियां भी उतनी ही अधिक पाई गई हैं।बिजनौर में 1,003 पंजीकरण निरस्त हुए हैं, जो लखनऊ के बाद दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।सहारनपुर में यहाँ 990 संपत्तियों के पंजीकरण को बोर्ड ने अस्वीकृत कर दिया है। बाराबंकी में 577, अमरोहा में 86, बागपत में 60 और बरेली में 17 संपत्तियों पर कार्रवाई हुई है।
वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि, यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि तकनीकी आधार पर की गई है।पोर्टल पर दर्ज की गई जानकारी भौतिक दस्तावेजों से मेल नहीं खाती थी।वक्फनामा या पूर्व के पंजीकरण प्रमाण पत्र अपलोड नहीं किए गए थे।कई संपत्तियों के मामले में स्थानीय स्तर पर सत्यापन के दौरान विसंगतियां पाई गईं।
6 जून की समय सीमा और मुतवलियों की जिम्मेदारी
भारत सरकार ने पोर्टल पर सभी सुधारों और नए पंजीकरण के लिए 6 जून की अंतिम तिथि निर्धारित की है। बोर्ड ने मुतवलियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे तय समय सीमा के भीतर अपनी संपत्तियों के सही दस्तावेज और विवरण पोर्टल पर अपडेट कर दें। यदि निर्धारित समय तक दस्तावेजों की कमी पूरी नहीं की गई, तो इन संपत्तियों को अवैध या विवादित की श्रेणी में डाला जा सकता है, जिससे उनके प्रबंधन और आय के उपयोग पर संकट खड़ा हो सकता है।
उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और उन पर अवैध निर्माण के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। इस डिजिटल सफाई अभियान को उसी दिशा में एक बड़े प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पहले ही वक्फ संपत्तियों के पुराने सर्वे और अभिलेखों की जांच के आदेश दे चुकी है। इस ताजा कार्रवाई से उन लोगों में खौफ है जिन्होंने वक्फ की जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा कर रखा है या उसे बेच दिया है।
बोर्ड का मानना है कि,एक बार जब सभी 1.26 लाख संपत्तियां सही दस्तावेजों के साथ 'उम्मीद' पोर्टल पर दर्ज हो जाएंगी, तो किसी भी संपत्ति का विवरण एक क्लिक पर उपलब्ध होगा। इससे न केवल मुकदमों में कमी आएगी, बल्कि इन संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग मुस्लिम समुदाय के कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर