लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती के शिक्षकों ने किया जोरदार प्रदर्शन
लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का यह प्रदर्शन मुख्य रूप से आरक्षण विसंगतियों और सुप्रीम कोर्ट में लंबित सुनवाई को लेकर है।प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि, कोर्ट में तारीख पर तारीख मिल रही है, लेकिन उनके पक्ष में कोई ठोस फैसला नहीं आ रहा। वे भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों के सही पालन की मांग कर रहे हैं।
lucknow
2:18 PM, Apr 22, 2026
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लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती के शिक्षकों ने किया जोरदार प्रदर्शन photo by- google
उत्तर प्रदेश। लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का यह प्रदर्शन मुख्य रूप से आरक्षण विसंगतियों और सुप्रीम कोर्ट में लंबित सुनवाई को लेकर है।प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि, कोर्ट में तारीख पर तारीख मिल रही है, लेकिन उनके पक्ष में कोई ठोस फैसला नहीं आ रहा। वे भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों के सही पालन की मांग कर रहे हैं।
पुलिस के साथ झड़प
विरोध के दौरान एक युवक ने हताशा में अपनी अस्थियां विसर्जन करने तक की बात कही, जो अभ्यर्थियों के मानसिक दबाव और आक्रोश को दर्शाता है।प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस और पीएसी बल तैनात किया गया था।
प्रशासनिक कार्रवाई
पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया, जो लखनऊ में धरने के लिए निर्धारित स्थान है।शिक्षकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि, यदि सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है, तो वे आने वाले समय में इससे भी बड़ा आंदोलन करेंगे।
लोगो के द्वारा बवाल
लखनऊ में शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों द्वारा किया गया प्रदर्शन काफी उग्र रहा, जिसे स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर "बवाल" के रूप में देखा जा रहा है। सैकड़ों अभ्यर्थियों ने अचानक विधान भवन का घेराव कर दिया और बीच सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
आरक्षण घोटाले का आरोप
प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की और नोकझोंक हुई। पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को जबरन बसों में भरा और इको गार्डन भेज दिया। प्रदर्शनकारी 'पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा' के बैनर तले विरोध कर रहे थे। उनका आरोप है कि, भर्ती में ओबीसी वर्ग को 27% के बजाय मात्र 3.86% और SC वर्ग को 21% के बजाय केवल 16.2% आरक्षण दिया गया है।
सरकार पर लापरवाही का आरोप
कुछ अभ्यर्थियों ने सड़कों पर भीख मांगकर अपना विरोध दर्ज कराया, यह दिखाने के लिए कि योग्य होने के बावजूद वे बेरोजगार और आर्थिक रूप से लाचार हैं।अभ्यर्थियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रखने के लिए कोई वकील उपस्थित नहीं हो रहा है, जिससे मामला पिछले कई महीनों से "तारीख पर तारीख" में उलझा हुआ है।प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए कई जिलों में प्रमुख नेताओं को हाउस अरेस्ट भी किया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लखनऊ पहुंचने में सफल रहे।
सोशल मीडिया पर हड़कंप
सोशल मीडिया पर 69000 शिक्षक भर्ती के इस प्रदर्शन ने जबरदस्त तूल पकड़ लिया है। अभ्यर्थियों के आक्रोश और पुलिस के साथ हुई झड़पों के वीडियो वायरल होने के बाद विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर कई प्रकार की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। पुलिस द्वारा अभ्यर्थियों को घसीटकर बसों में भरने और महिला अभ्यर्थियों के साथ हुई धक्का-मुक्की के वीडियो फेसबुक और यूट्यूब पर तेजी से शेयर किए जा रहे हैं।
भावुक संदेश
एक अभ्यर्थी द्वारा अपनी अस्थियां विसर्जन करने की बात और चारबाग में भीख मांगकर विरोध करने की तस्वीरों ने लोगों को झकझोर दिया है। सोशल मीडिया यूजर्स इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और "मानसिक प्रताड़ना" बता रहे हैं। लोग इस बात पर भी नाराजगी जता रहे हैं कि पिछले कई महीनों से सुप्रीम कोर्ट में केवल "तारीख पर तारीख" मिल रही है और सरकार का पक्ष रखने के लिए वकील उपस्थित नहीं हो रहे हैं।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर