36 लाख में बनी सड़क 36 दिन में उखड़ी,तो हरकत में आए जिम्मेदार लखनऊ BKT नगर पंचायत की हकीकत
राजधानी लखनऊ की चर्चित नगर पंचायत बख्शी का तालाब में विकास के नाम पर हुए कथित निर्माण कार्यों की पोल खुलने के बाद सत्ता और सिस्टम दोनों हरकत में आ गए हैं। 36 लाख रुपये की लागत से बनी 500 मीटर डामर सड़क के महज 36 दिन में उखड़ जाने की खबर सामने आते ही प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई। आनन-फानन में सड़क की दोबारा मरम्मत शुरू कराई गई, लेकिन सवाल यह है कि यदि अखबार में मामला न उठा होता तो क्या जिम्मे
lucknow
1:50 PM, Jan 18, 2026
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सड़क का निरीक्षण करते विधायक योगेश शुक्ला फोटो सौ. bma 7
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सबसे बड़ी नगर पंचायत बख्शी का तालाब में विकास के नाम पर हुए कथित निर्माण कार्यों की पोल खुलने के बाद सत्ता और सिस्टम दोनों हरकत में आ गए हैं। 36 लाख रुपये की लागत से बनी 500 मीटर डामर सड़क के महज 36 दिन में उखड़ जाने के शीर्षक से खबर सामने आते ही प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई। आनन-फानन में सड़क की दोबारा मरम्मत शुरू कराई गई, लेकिन सवाल यह है कि यदि bma7.in में मामला न उठा होता तो क्या जिम्मेदार जागते?
40 दिन पहले बनी सड़क पर पैचिंक करते मजदूर सौ0 bma7.in
विधायक योगेश शुक्ला ने खबर को लिया संज्ञान किया निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक योगेश शुक्ला ने स्वयं बाना पुलिया से किसान पथ अंडरपास तक बनी सड़क का स्थलीय निरीक्षण किया। सड़क की बदहाल स्थिति देखकर विधायक ने ठेकेदार और संबंधित इंजीनियर को मौके पर ही फटकार लगाई और साफ शब्दों में कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दो टूक बोले विधायक जनता के पैसे से खिलवाड़ नही होगा बर्दाश्त
विधायक ने दो टूक कहा कि यह केवल सड़क उखड़ने का मामला नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही और जवाबदेही के अभाव का उदाहरण है। उन्होंने निर्देश दिए कि मरम्मत कार्य पूरी गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के अनुरूप कराया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसे कार्यों की पूर्व और पश्च निगरानी अनिवार्य हो।
मजदूरों की खुदाई में दिखने लगी सड़क पर सूखी गिटटी सौ0 bma7.in
जनता बोली सड़क पर लीपापोती से क्या धुल जाएंगे भ्रस्टाचार के दाग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान शिकायतें उठाई गई थीं, लेकिन तब किसी ने ध्यान नहीं दिया। लोगों ने आरोप लगाया कि जब तक मामला सार्वजनिक नहीं हुआ, तब तक जिम्मेदार मौन साधे रहे। अब मरम्मत शुरू होने से भले राहत मिली हो, लेकिन जनता पूछ रही है कि क्या केवल लीपापोती से भ्रष्टाचार के आरोप धुल जाएंगे ? क्षेत्रवासियों की मांग है कि मरम्मत के साथ-साथ यह भी स्पष्ट किया जाए कि घटिया निर्माण का जिम्मेदार कौन है—ठेकेदार, इंजीनियर या फिर गुणवत्ता की निगरानी करने वाले अधिकारी? जब तक दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक विकास कार्यों की विश्वसनीयता पर सवाल बने रहेंगे।
- सवालिया बॉक्स : जनता पूछ रही है
• अगर खबर न छपती तो क्या सड़क यूँ ही उखड़ी पड़ी रहती?
• 36 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद मानकों की अनदेखी किसके इशारे पर हुई?
• क्या ठेकेदार-इंजीनियर पर कार्रवाई होगी या मामला मरम्मत तक सीमित रहेगा?

लेखक के बारे में
राज प्रताप सिंह
वरिष्ठ संवाददाता