गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान, गांव और संविधान की असली परीक्षा
देश का अन्नदाता किसान आज भी सुबह सूरज निकलने से पहले खेतों में उतरता है। वह देश को अनाज देता है, लेकिन जब अपने अधिकारों की बात आती है तो उसे दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। संविधान ने किसान को जमीन का अधिकार,बराबरी और न्याय का भरोसा दिया,मगर जमीनी सच्चाई यह है कि आज भी जमीन विवाद,चकबंदी की उलझन,मुआवज़े की देरी और सरकारी योजनाओं की जटिलता किसान के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है और वह इनमें फंसा है।
lucknow
4:26 AM, Jan 26, 2026
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बीते वर्ष किले पर ध्वजारोहण करते प्रधानमंत्री फोटो सौ.bma 7
उत्तर प्रदेश। 26 जनवरी केवल लखनऊ की परेड या बड़े मंचों का दिन नहीं है। गणतंत्र की असली पहचान गांव की चौपाल, खेत की मेड़ और किसान की मेहनत में दिखाई देती है। इसी दिन देश ने संविधान अपनाया था, जिसने यह भरोसा दिया कि भारत का हर नागरिक—चाहे वह गांव में रहने वाला किसान ही क्यों न हो—कानून की नजर में बराबर है।
किसान का बड़ा योग दान
देश का अन्नदाता किसान आज भी सुबह सूरज निकलने से पहले खेतों में उतरता है। वह देश को अनाज देता है, लेकिन जब अपने अधिकारों की बात आती है तो उसे दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। संविधान ने किसान को जमीन का अधिकार, बराबरी और न्याय का भरोसा दिया, मगर जमीनी सच्चाई यह है कि आज भी जमीन विवाद, चकबंदी की उलझन, मुआवज़े की देरी और सरकारी योजनाओं की जटिलता किसान के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
किसान की आवाज़ नहीं पहुंची
गांव में गणतंत्र की जड़ें पंचायत से जुड़ी हैं। पंचायत चुनाव, ग्राम सभा और विकास योजनाएं—यही लोकतंत्र की पहली सीढ़ी हैं। लेकिन अफसोस कि ,कई जगह ग्राम सभा केवल कागजों तक सीमित रह गई है। निर्णय चंद लोगों के हाथ में सिमट जाते हैं और आम किसान की आवाज दब जाती है। गणतंत्र तभी सफल होगा जब हर किसान ग्राम सभा में अपनी बात खुलकर रख सके और उसका सम्मान हो।
खेती करना नहीं है आसान काम
खेती आज आसान काम नहीं रह गई है। खाद, बीज, डीजल और बिजली महंगी होती जा रही है, जबकि फसलों का सही दाम नहीं मिल पा रहा। सिंचाई की समस्या, आवारा पशु, प्राकृतिक आपदाएं और बाजार की मार किसान की कमर तोड़ रही हैं। संविधान ने सरकार को यह जिम्मेदारी दी है कि वह नागरिक को सम्मानजनक जीवन दे, फिर भी किसान आज भी कर्ज और चिंता के बोझ तले दबा हुआ है।
कई जगह नहीं पहुंची सरकारी योजना
गणतंत्र दिवस हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि, क्या योजनाएं सही किसान तक पहुंच रही हैं? क्या प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा और सिंचाई योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद को मिल रहा है? जवाब कई जगह हां है, लेकिन कई गांवों में आज भी किसान जानकारी और सुविधा के अभाव में वंचित है।
क्यों गांव का युवा शहर जाने को मजबूर
आज गांव का युवा भी बड़ी चुनौती है। पढ़-लिखकर शहर जाना उसकी मजबूरी बन गई है, क्योंकि गांव में रोजगार और सुविधाओं की कमी है। अगर गांव मजबूत होंगे, किसान आत्मनिर्भर होगा, तभी देश सशक्त बनेगा। गणतंत्र का अर्थ यही है कि विकास की रोशनी खेत-खलिहान तक पहुंचे।गणतंत्र दिवस पर हमें संकल्प लेना होगा कि संविधान केवल किताबों में नहीं, खेतों और गांवों में उतरे। किसान को न्याय मिले, उसकी जमीन सुरक्षित रहे, उसकी उपज का उचित मूल्य मिले और गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार की मजबूत व्यवस्था हो।

लेखक के बारे में
राज प्रताप सिंह
वरिष्ठ संवाददाता