राघव चड्ढा ने थामा भाजपा का दामन, राज्यसभा में 'आप' के दो-तिहाई सांसदों का विलय
भारतीय राजनीति में आज उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया, जब आम आदमी पार्टी के सबसे युवा और चर्चित चेहरों में से एक, राघव चड्ढा ने पार्टी को अलविदा कह दिया। दिल्ली में आयोजित एक नाटकीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने न केवल भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा की, बल्कि राज्यसभा में 'आप' के संसदीय दल के दो-तिहाई हिस्से को भाजपा में विलय करने का भी दावा पेश कर दिया।
new delhi
7:18 PM, Apr 24, 2026
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केजरीवाल को सबसे बड़ा झटका सौ0 bma7.in
उत्तर प्रदेश। नई दिल्ली।भारतीय राजनीति में आज उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया, जब आम आदमी पार्टी के सबसे युवा और चर्चित चेहरों में से एक, राघव चड्ढा ने पार्टी को अलविदा कह दिया। दिल्ली में आयोजित एक नाटकीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने न केवल भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा की, बल्कि राज्यसभा में 'आप' के संसदीय दल के दो-तिहाई हिस्से को भाजपा में विलय करने का भी दावा पेश कर दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, "हमने यह कठिन लेकिन ऐतिहासिक फैसला देश के व्यापक हित में लिया है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत खुद को भारतीय जनता पार्टी में विलय करते हैं।"कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, एंटी-डिफेक्शन लॉ से बचने के लिए चड्ढा ने यह दो-तिहाई वाला दांव चला है। यदि किसी दल के 66% से अधिक विधायक या सांसद एक साथ विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती। चड्ढा के इस कदम से राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की नींव हिल गई है।राघव चड्ढा को कभी अरविंद केजरीवाल का सबसे भरोसेमंद 'संकटमोचक' माना जाता था। चाहे वह पंजाब चुनाव की रणनीति हो या राज्यसभा में पार्टी का पक्ष रखना, चड्ढा हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहे। लेकिन पिछले कुछ महीनों से उनके और पार्टी आलाकमान के बीच दूरियां बढ़ती नजर आ रही थीं।
हाल ही में चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उनके कद को छोटा करने की कोशिश के रूप में देखा गया। चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि पार्टी अब अपने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के मूल सिद्धांतों से भटक गई है और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का केंद्र बन गई है। उन्होंने खुद को "गलत जगह फंसा हुआ व्यक्ति" बताते हुए कहा कि वह अब प्रधानमंत्री मोदी के विकास के विजन के साथ जुड़कर देश की सेवा करना चाहते हैं।
भजपा के नेता राघव चड्ढा को मिठाई खिलाते हुए सौ0 bma7.in
पार्टी में बड़ी टूट: साथ आए कई दिग्गज
बताया जा रहा है कि, सिर्फ राघव चड्ढा ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी के कई अन्य राज्यसभा सांसदों ने भी भाजपा का पटका पहन लिया है। खबरों के अनुसार, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल और हरभजन सिंह जैसे बड़े नाम भी इस विलय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यह आम आदमी पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा सांगठनिक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
भाजपा के लिए यह जीत केवल एक विपक्षी नेता को अपने पाले में लाना नहीं है, बल्कि दिल्ली और पंजाब की राजनीति में 'आप' की पकड़ को कमजोर करना भी है।इस विलय के बाद उच्च सदन में भाजपा की स्थिति और अधिक मजबूत हो जाएगी।राघव चड्ढा के रूप में भाजपा को एक शिक्षित, प्रखर वक्ता और युवाओं के बीच लोकप्रिय नेता मिल गया है।दिल्ली नगर निगम और आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा इस मुद्दे को भुनाकर 'आप' को "बिखरती हुई पार्टी" के रूप में पेश करेगी।
एक नए युग की शुरुआत
इस घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी के मुख्यालय से तीखी प्रतिक्रिया आई है। पार्टी प्रवक्ताओं ने इसे "खरीद-फरोख्त की राजनीति" और "एजेंसियों का डर" करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह जनता के जनादेश का अपमान है और वे इस विलय को कोर्ट में चुनौती देंगे।राघव चड्ढा का भाजपा में जाना केवल एक व्यक्ति का दल बदलना नहीं है, बल्कि भारतीय राजनीति के बदलते ध्रुवीकरण का संकेत है। जहां एक तरफ अरविंद केजरीवाल इसे अपनी पार्टी के खिलाफ साजिश बता रहे हैं, वहीं राघव चड्ढा का यह कदम उन्हें भाजपा के भीतर एक नई और बड़ी भूमिका के लिए तैयार कर सकता है।आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि, क्या निर्वाचन आयोग और राज्यसभा के सभापति इस विलय को संवैधानिक मान्यता देते हैं। लेकिन फिलहाल, राजधानी की गलियों में बस एक ही चर्चा है— 'आप' का राघव अब भाजपा का हुआ।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर