24.50 लाख का पार्क बना भ्रष्टाचार की भेंट, मामपुर बाना में विकास के नाम पर खुली लूट
राजधानी लखनऊ की नगर पंचायत बख्शी का तालाब में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की खुली बंदरबांट का एक और मामला सामने आया है। मामपुर बाना क्षेत्र में बख्शी का तालाब थाने के पीछे राज्य वित्त आयोग (वर्ष 2023-24) से स्वीकृत करीब 24.50 लाख रुपये की लागत से बनाया गया पार्क आज न सिर्फ अधूरा है, बल्कि जंगल और खंडहर में तब्दील होकर भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयां कर रहा है। ग्रामीणों ने इस पार्क की जांच
lucknow
12:05 PM, Jan 19, 2026
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मामपुर बाना में बने अधूरे पार्क में उगा जंगल फोटो सौ.bma 7
उत्तर प्रदेश/ लखनऊ की नगर पंचायत बख्शी का तालाब में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की खुली बंदरबांट का एक और मामला सामने आया है। मामपुर बाना क्षेत्र में थाने के पीछे राज्य वित्त आयोग (वर्ष 2023-24) से स्वीकृत करीब 24.50 लाख रुपये की लागत से बनाया गया पार्क आज न सिर्फ अधूरा है, बल्कि जंगल और खंडहर में तब्दील होकर भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयां कर रहा है।
पार्क सौदर्यीकरण में लाखों रुपए खर्च फिर भी व्यवस्था बदतर
पार्क के नाम पर न बैठने की व्यवस्था की गई, न पाथवे बना, न लाइटिंग लगी और न ही कोई सौंदर्यीकरण हुआ। मौके पर सिर्फ झाड़ियां, ऊंची घास और बेतरतीब अधूरा निर्माण दिखाई देता है। ऐसे में सवाल नहीं, बल्कि सीधा आरोप उठता है कि लाखों रुपये का भुगतान बिना कार्य पूरा किए ही कर दिया गया।स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों, अभियंता और ठेकेदार की मिलीभगत से इस योजना को कागजों में पूरा दिखाकर रकम डकार ली गई। यदि ऐसा नहीं है, तो फिर पार्क का हाल यह क्यों है?
सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
सबसे गंभीर बात यह है कि थाने के पीछे स्थित यह पार्क अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बन सकता है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी खतरा मंडरा रहा है। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से अब तक न जांच हुई और न ही किसी पर कार्रवाई।
रिकवरी और एफआईआर की मांग
क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की विजिलेंस और तकनीकी जांच कराई जाए। दोषी अधिकारियों, अभियंता और ठेकेदार से पूरी धनराशि की रिकवरी, साथ ही एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही पार्क निर्माण की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराकर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।
विकास नहीं, भ्रष्टाचार की हरियाली
जहां पार्क में फूल-पौधे लगने थे, वहां आज भ्रष्टाचार की झाड़ियां लहलहा रही हैं। मामपुर बाना का यह पार्क नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन गया है।
भ्रष्टाचार पर जनता पूछ रही जिम्मेदारों से यह सवाल
• जब पार्क अधूरा है तो पूरी धनराशि किसकी अनुमति से जारी हुई?
• माप पुस्तिका (एमबी) में कौन-कौन से फर्जी कार्य दर्शाए गए?
• किस अभियंता ने बिना मौके का सत्यापन किए गुणवत्ता प्रमाणपत्र जारी किया?
• नगर पंचायत अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी की निगरानी कहां थी?
• क्या यह राशि जनता के लिए खर्च हुई या फाइलों में गुम कर दी गई?

लेखक के बारे में
राज प्रताप सिंह
वरिष्ठ संवाददाता