लखनऊ में यूजीसी रेगुलेशन के लिए पल्लवी पटेल का 'आर-पार' का मार्च
लखनऊ की सड़कें शनिवार को उस समय नारों और नारंगी झंडों से पट गईं, जब अपना दल (कमेरावादी) की कद्दावर नेता और विधायक पल्लवी पटेल ने 'यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026' की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। चारबाग से विधानसभा तक की दूरी तय करने वाला यह मार्च केवल एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उच्च शिक्षा में पिछड़ों और वंचितों के हक की लड़ाई का एक नया अध्याय था।
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2:22 PM, May 9, 2026
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लखनऊ में यूजीसी रेगुलेशन के लिए पल्लवी पटेल का 'आर-पार' का मार्च सौ0 bma7.in
लखनऊ की सड़कें शनिवार को उस समय नारों और नारंगी झंडों से पट गईं, जब अपना दल (कमेरावादी) की कद्दावर नेता और विधायक पल्लवी पटेल ने 'यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026' की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। चारबाग से विधानसभा तक की दूरी तय करने वाला यह मार्च केवल एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उच्च शिक्षा में पिछड़ों और वंचितों के हक की लड़ाई का एक नया अध्याय था।
हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं और कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरीं पल्लवी पटेल ने स्पष्ट कर दिया कि अब वंचित समाज अपने अधिकारों के लिए और इंतजार नहीं करेगा। मार्च के दौरान 'हक दो या जेल दो' के नारे गूंजते रहे। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में आज भी एक विशेष वर्ग का वर्चस्व है, जिसे खत्म करने के लिए यूजीसी रेगुलेशन 2026 को लागू करना अनिवार्य है।पल्लवी पटेल ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, "सिस्टम की दीवारों को अब ढहना होगा। हम न्याय की गुहार नहीं लगा रहे, हम अपना संवैधानिक अधिकार मांग रहे हैं। अगर सरकार हमें रोकने के लिए लाठियों और बैरिकेड्स का सहारा लेती है, तो वह हमारी वैचारिक शक्ति को कम नहीं कर सकती।
इस पूरे विरोध प्रदर्शन के केंद्र में यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) का नया रेगुलेशन है। पल्लवी पटेल और उनके समर्थकों का दावा है कि इस रेगुलेशन के लागू होने से विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती और छात्रों के प्रवेश में होने वाले कथित भेदभाव पर लगाम लगेगी। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में पिछड़ों और आदिवासियों की अनदेखी की जा रही है, जिसे सुधारने के लिए यह नया कानून एक 'फिल्टर' की तरह काम करेगा, जो अयोग्यता और पक्षपात को बाहर कर देगा।
प्रशासन ने इस मार्च को विधानसभा तक पहुँचने से रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। हजरतगंज और उसके आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात था। जैसे ही मार्च आगे बढ़ा, पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने दबाव बनाया, जिसके बाद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। अंततः, पल्लवी पटेल को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया गया।
हिरासत में लिए जाने के बाद भी पल्लवी पटेल के तेवर ढीले नहीं पड़े। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए एक भावुक लेकिन कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल लखनऊ की सड़कों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे गांव-गांव तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे तब तक चैन से न बैठें जब तक न्याय सुनिश्चित न हो जाए।पल्लवी पटेल का यह तेवर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए समीकरण की ओर इशारा कर रहा है। छात्र राजनीति और सामाजिक न्याय के मुद्दों को एक साथ जोड़कर वे युवाओं के बीच अपनी पैठ मजबूत कर रही हैं। जिस तरह से हजारों छात्रों ने उनके एक बुलावे पर लखनऊ की तपती सड़कों पर मार्च किया, वह भविष्य की राजनीति के लिए एक बड़ा संकेत है।
लखनऊ का यह विरोध प्रदर्शन यह साफ कर देता है कि, आने वाले दिनों में शिक्षा और सामाजिक समानता के मुद्दे उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहने वाले हैं। सरकार के लिए पल्लवी पटेल की यह चुनौती एक बड़ी सिरदर्द साबित हो सकती है।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर