20 बच्चों की जान बचाकर शहीद हो गई नीमच की 'मदर इंडिया,कंचनबाई
कंचनबाई ने अपनी जान देकर 20 बच्चों की ढाल बन गई। 3 फरवरी की दोपहर आंगनबाड़ी केंद्र हुई इस घटना ने पूरे देश को कंचनबाई के अदम्य साहस,कर्तव्य परायणता को नमन किया है। कंचनबाई तबतक नहीं रुकी जबतक उन्होंने सभी 20 बच्चों को मधुमक्खियों के हमले से सुरक्षित नहीं कर लिया। आखिरकार में वह गिर गई। हॉस्पिटल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मध्यप्रदेश नीमच की यह मदर इंडिया अपना बलिदान देकर 20 मांओं की कोख सूनी
madhya pradesh
5:35 PM, Feb 8, 2026
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बच्चों को बचाकर बलिदान हो गई कंचनबाई bma7.in
मध्यप्रदेश । नीमच। कंचनबाई ने अपनी जान देकर 20 बच्चों की ढाल बन गई। 3 फरवरी की दोपहर आंगनबाड़ी केंद्र हुई इस घटना ने पूरे देश को कंचनबाई के अदम्य साहस,कर्तव्य परायणता को नमन किया है। कंचनबाई तबतक नहीं रुकी जबतक उन्होंने सभी 20 बच्चों को मधुमक्खियों के हमले से सुरक्षित नहीं कर लिया। आखिरकार में वह गिर गई। हॉस्पिटल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मध्यप्रदेश नीमच की यह मदर इंडिया अपना बलिदान देकर 20 मांओं की कोख सूनी होने से बचा लिया ।
मधुमक्खियों के झुंड ने किया बच्चों पर हमला
नीमच जिले के रानपुर गांव में 3 फरवरी, मंगलवार की दोपहर मानवता, साहस और मातृत्व की ऐसी मिसाल सामने आई, जिसने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध और भावुक कर दिया। मडावदा पंचायत के आंगनवाड़ी केंद्र में खेल रहे बच्चों पर अचानक मधुमक्खियों के बड़े झुंड ने हमला कर दिया। अफरा-तफरी मच गई, मासूम बच्चे चीखते-भागते नजर आए और कुछ जमीन पर गिर पड़े। स्थिति भयावह थी और हर कोई खुद को बचाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इसी बीच आंगनवाड़ी में कार्यरत कंचन बाई मेघवाल बच्चों के लिए ढाल बनकर खड़ी हो गईं।
तिरपाल टाट पट्टी से 20 बच्चों को ढका,कमरे तक पहुंचाया
कंचन बाई ने बिना अपनी जान की परवाह किए तत्काल सूझबूझ दिखाई। उन्होंने तिरपाल, दरी और टाट-पट्टी से बच्चों को ढकना शुरू किया और एक-एक कर करीब 20 बच्चों को सुरक्षित कमरों के भीतर पहुंचाया। इस दौरान हजारों मधुमक्खियां लगातार उन पर हमला करती रहीं। शरीर पर अनगिनत डंक लगते रहे, लेकिन वे तब तक नहीं रुकीं जब तक आखिरी बच्चा भी सुरक्षित नहीं हो गया। बच्चों की जान बचाने के इस संघर्ष में वे गंभीर रूप से घायल हो गईं और मौके पर ही गिर पड़ीं।
पुलिस कर्मियों ने पहुंचाया हॉस्पिटल
सूचना मिलते ही डायल 112 के आरक्षक कालूनाथ और पायलट राजेश राठौर उन्हें तुरंत स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। कंचन बाई आंगनवाड़ी में मध्यान भोजन बनाती थीं और जय माता दी स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष के रूप में गांव की सक्रिय एवं सहयोगी महिला मानी जाती थीं। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पति पहले से ही पैरालिसिस से जूझ रहे हैं, वहीं एक बेटा और दो बेटियों के सिर से मां का साया उठ गया।
मदर इंडिया कंचनबाई को शहीद का दर्जा देने की मांग
घटना के बाद पूरे गांव में शोक और दहशत का माहौल है। आंगनवाड़ी के पास लगे पेड़ पर मधुमक्खियों के छत्ते के कारण ग्रामीण वहां जाने से भी डर रहे हैं। ग्रामीण प्रशासन से तत्काल छत्ते हटाने और क्षेत्र को सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं, साथ ही कंचन बाई के इस असाधारण साहस को देखते हुए उन्हें शहीद का दर्जा और परिवार को उचित सहायता देने की मांग भी उठने लगी है।

लेखक के बारे में
अनिल कुमार सिंह
वरिष्ठ संवाददाता