वन विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते काटे जा रहे नीम के औषधीय पेड़
लखनऊ के बख्शी का तालाब, इटौंजा और महिंगवा क्षेत्रों में वन विभाग के अधिकारियों की कथित उदासीनता के कारण हरे नीम के पेड़ों की अवैध कटाई की खबर सामने आ रही हैं। स्थानीय निवासियों और सोशल मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंगलवार को राजापुर में कई औषधीय नीम के पेड़ काटे गए, जिसे लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
lucknow
5:56 PM, Apr 14, 2026
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हरियाली के दुश्मनो ने नीम के पेड़ो को बनाया अपना निशना सौ0 bma7.in
उत्तर प्रदेश। लखनऊ के बख्शी का तालाब, इटौंजा और महिंगवा क्षेत्रों में वन विभाग के अधिकारियों की कथित उदासीनता के कारण हरे नीम के पेड़ों की अवैध कटाई की खबर सामने आ रही हैं। स्थानीय निवासियों और सोशल मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंगलवार को राजापुर में कई औषधीय नीम के पेड़ काटे गए, जिसे लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
वृक्षारोपण अभियान पर सवाल
बताया जा रहा है कि,इटौंजा क्षेत्र के गांवों में लकड़ी माफिया सक्रिय हैं और हरियाली को लगातार नुकसान पहुँचा रहे हैं।आरोप है कि, वन विभाग के कर्मचारी सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने रहते हैं और जब मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़ता है, तो केवल जुर्माना लगाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।एक तरफ सरकार प्रतिवर्ष बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाती है, वहीं दूसरी ओर पुराने और औषधीय पेड़ों का संरक्षण करने में प्रशासन विफल दिख रहा है।
कानूनी नियमो का उल्लघंन
यूपी में पेड़ों की कटाई को लेकर सख्त नियम लागू हैं कि,नीम, आम और शीशम सहित 29 प्रमुख प्रजातियों के पेड़ काटने पर 31 दिसंबर 2027 तक कड़ा प्रतिबंध है। बिना वन विभाग की पूर्व अनुमति के पेड़ काटना गैरकानूनी है। ऐसा करने पर जुर्माना,एफआईआर और जेल की सजा का प्रावधान है।अनुमति मिलने पर भी, काटे गए प्रत्येक पेड़ के बदले 10 नए पौधे लगाने का शपथपत्र देना अनिवार्य होता है। लेकिन हरियाली के दुश्मनो के हौसने दिन— प्रतिदिन बढ़तें जा रहे है। जिसके परिणामस्वरूप हरे— भरे नीम के पेड़ो की कटाई लगातार हो रही है।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर