देश की सुरक्षा में तैनात जवान के साथ दुर्व्यवहार,मथुरा के चौमुहांथ क्षेत्र की घटना
मथुरा के चौमुहांथ थाना क्षेत्र से देश के जवान से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। है। देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल कानूनी बल्कि नैतिक रूप से भी चिंताजनक है। बताया जा रहा है कि,भारतीय सेना के जवान राधाचरण (जो बीकानेर में तैनात हैं) छुट्टी पर अपने गांव आए हुए थे। वह अपने मित्र और बीएसएफ जवान महेश कुमार से मिलने उनके घर गए थे।
mathura
1:48 PM, Mar 3, 2026
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देश की सुरक्षा में तैनात जवान के साथ दुर्व्यवहा सौ0 bma7.in
उत्तर प्रदेश। मथुरा के चौमुहांथ थाना क्षेत्र से देश के जवान से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। है। देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल कानूनी बल्कि नैतिक रूप से भी चिंताजनक है। बताया जा रहा है कि,भारतीय सेना के जवान राधाचरण (जो बीकानेर में तैनात हैं) छुट्टी पर अपने गांव आए हुए थे। वह अपने मित्र और बीएसएफ जवान महेश कुमार से मिलने उनके घर गए थे।
विवाद का कारण
स्थानीय पुलिस जैंत थाना क्षेत्र की आझई चौकी के प्रभारी के नेतृत्व में किसी पुराने मामले में महेश को हिरासत में लेने पहुंची थी। उस समय महेश की गोद में उनका 5 महीने का बच्चा था। राधाचरण ने मानवीय आधार पर पुलिस से केवल इतना अनुरोध किया कि बच्चे को उसकी माँ को सौंप दिया जाए।
मारपीट का आरोप
आरोप है कि, बच्चे को उसकी माँ को सौंप दिया जाए,इसी बात पर चौकी प्रभारी ने अभद्रता शुरू कर दी। जब राधाचरण ने अपना परिचय एक फौजी के रूप में दिया, तो दरोगा ने और अधिक आक्रामक होकर उनके साथ मारपीट की। खबरों के अनुसार, 14 सेकंड के भीतर जवान के चेहरे पर करीब 6 मुक्के मारे गए, जिसका वीडियो सीसीटीवी में भी कैद हुआ है।
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वर्तमान स्थिति
पीड़ित जवान राधाचरण ने मथुरा एसएसपी को लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है और इसकी शिकायत लखनऊ में भी दर्ज कराई गई है। पुलिस के आला अधिकारियों ने मामले की जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
उचित और अनुचित का तर्क
किसी भी सभ्य समाज और लोकतांत्रिक व्यवस्था में वर्दीधारी बलों के बीच इस तरह का टकराव मनोबल गिराने वाला होता है। सेना के जवान जो कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करते हैं, उनके साथ सार्वजनिक रूप से अभद्रता और मारपीट करना उनके सम्मान और गरिमा के विरुद्ध है। प्रशासन को ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि रक्षक ही भक्षक न नजर आएं।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर