संदिग्ध हालत में घायल विवाहिता ने 15 दिन बाद तोड़ा दम,गला दबाकर हत्या का आरोप
गोसाईगंज थाना क्षेत्र के अनूप खेड़ा गांव में बीते 20 अप्रैल को संदिग्ध परिस्थितियों में मरणासन्न स्थिति में मिली विवाहिता 26 वर्षीय शालू रावत की इलाज के दौरान मौत हो गई। 15 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद शालू ने सोमवार को ट्रामा सेंटर में अंतिम सांस ली। मृतका के पिता ने पति और देवर पर बेरहमी से मारपीट करने और गला दबाकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है।
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3:44 PM, May 5, 2026
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संदिग्ध हालत में घायल विवाहिता ने 15 दिन बाद तोड़ा दम सौ0 bma7.in
लखनऊ।गोसाईगंज थाना क्षेत्र के अनूप खेड़ा गांव में बीते 20 अप्रैल को संदिग्ध परिस्थितियों में मरणासन्न स्थिति में मिली विवाहिता 26 वर्षीय शालू रावत की इलाज के दौरान मौत हो गई। 15 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद शालू ने सोमवार को ट्रामा सेंटर में अंतिम सांस ली। मृतका के पिता ने पति और देवर पर बेरहमी से मारपीट करने और गला दबाकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोसाईगंज के नंदा खेड़ा निवासी दुखी लाल ने अपनी बेटी शालू रावत की शादी करीब 9 वर्ष पूर्व अनूप खेड़ा निवासी बलराम रावत के साथ की थी। बलराम पेशे से ऑटो चालक है। दोनों की एक 6 साल की बेटी भी है और बताया जा रहा है कि शालू गर्भवती थी।पीड़ित पिता दुखी लाल का आरोप है कि शादी के बाद से ही बलराम अक्सर शराब के नशे में शालू के साथ मारपीट करता था। कई बार विवाद बढ़ने पर शालू अपने मायके चली जाती थी, लेकिन सामाजिक लोक-लाज और सुलह-समझौते के बाद उसे वापस ससुराल भेज दिया जाता था। उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि यह समझौता उनकी बेटी की जान ले लेगा।
घटना वाले दिन यानी 20 अप्रैल की रात करीब 9:00 बजे बलराम ने शालू के पिता को फोन कर सूचना दी कि, उनकी बेटी ने फंदे से लटक कर आत्महत्या का प्रयास किया है। सूचना मिलते ही बदहवास पिता जब बेटी के ससुराल पहुँचे, तो वहां का नजारा कुछ और ही था। शालू फंदे पर नहीं बल्कि चारपाई के नीचे जमीन पर पड़ी थी और उसकी सांसें अत्यंत धीमी चल रही थीं।पिता ने तत्काल उसे अमेठी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। उसी समय पिता की तहरीर पर पुलिस ने पति बलराम और देवर लवकुश के खिलाफ मारपीट और जानलेवा हमले की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया था।
शालू की हालत पिछले 15 दिनों से नाजुक बनी हुई थी। सोमवार को अचानक उसकी स्थिति और बिगड़ने लगी, जिसके बाद उसे अमेठी के निजी अस्पताल से लखनऊ के ट्रामा सेंटर के लिए रेफर किया गया। हालांकि, अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बेटी की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया।
मृतका के पिता दुखी लाल ने आरोप लगाया कि, शालू के शरीर पर जगह-जगह चोटों के गहरे निशान थे, जो चीख-चीख कर बयां कर रहे थे कि उसके साथ बर्बरता की गई है। उनका दावा है कि 20 अप्रैल की रात को पति और देवर ने मिलकर उसे बुरी तरह पीटा और फिर गला दबाकर उसे मारने की कोशिश की। फंदे की कहानी महज पुलिस को गुमराह करने और अपराध को छिपाने के लिए रची गई थी।
शालू की मौत के बाद अब पुलिस इस मामले को हत्या की धाराओं में तरमीम (बदलने) की तैयारी कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों (गला दबाने या फंदे से दम घुटने) का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। फिलहाल, पुलिस नामजद आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।इस घटना ने एक बार फिर घरेलू हिंसा के भयावह रूप और एक मासूम बच्ची के सिर से मां का साया छीन जाने के दर्दनाक सच को सामने ला दिया है।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर