रात के अंधेरे में औषधीय नीम,बेल और आम की हरियाली का सौदा,जिम्मेदार वन विभाग AC में
बख्शी का तालाब थाना क्षेत्र के पर्वतपुर गांव गांव में पर्यावरण संरक्षण के दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। वन विभाग और पुलिस की मिलीभगत के चलते वन माफियाओं ने रात दिन- नीम और बेल के दर्जनों हरे-भरे पेड़ों पर आरा चलाकर उन्हें धराशायी कर दिया। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि, इस अवैध कटान को वन विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय पुलिस की शह पर अंजाम दिया गया है।
lucknow
6:25 PM, Apr 24, 2026
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पर्वतपुर गांव में औषधीय नीम और बेल की अवैध कटान सौ0 bma7.in
लखनऊ। बख्शी का तालाब थाना क्षेत्र के पर्वतपुर गांव गांव में पर्यावरण संरक्षण के दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। वन विभाग और पुलिस की मिलीभगत के चलते वन माफियाओं ने रात दिन- नीम और बेल के दर्जनों हरे-भरे पेड़ों पर आरा चलाकर उन्हें धराशायी कर दिया। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि, इस अवैध कटान को वन विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय पुलिस की शह पर अंजाम दिया गया है।
लकड़ी माफियाओं का एक गिरोह अब भारी भरकम मशीनरी और मजदूरों के साथ रात दिन गांव की हरियाली को रौंदने पर आमादा है। गांवों में बिना परमिट आम और नीम के पुराने और कीमती पेड़ों को बेरहमी से काटना शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि, मशीनी आरे की आवाज दूर तक सुनाई नही देती है। इसलिए वन माफियाओं को किसी का डर नही रहता है। अगर किसी ने शिकायत कर भी दिया तो कार्यवाही से पहले पुलिस और वन कर्मी इनको अलर्ट कर देते है। जिससे औरी फौरी कार्यवाही ही होती है।
सुबह होते ही मौके पर न तो पेंड होते है और ना- वन माफिया
सूरज की पहली किरण निकलने से पहले ही उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लादकर काटे गए पेंडों को ठिकाने लगा दिया जाता है। मौके पर अब केवल पेड़ों के ठूंठ और बिखरी हुई टहनियां ही बचती हैं, जो इस हरियाली के विनाश की गवाही दे रही हैं। आमतौर पर लकड़ी ढोने के लिए वन विभाग के परमिट की आवश्यकता होती है, लेकिन इतनी बड़ी खेप बिना किसी रोक-टोक के गांव से बाहर निकल गई,जो वन सम्पदा की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है।
प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप
स्थानीय निवासियों ने बताया कि, इस पूरे खेल में कठवारा चौकी की पुलिस और वन विभाग के कुछ निचले स्तर के कर्मियों की भूमिका संदिग्ध है। आरोप है कि,गश्त के नाम पर पुलिस उस इलाके से नदारद रही और वन विभाग के जिम्मेदारों ने अपनी आंखें मूंद लीं। ग्रामीणों का कहना है कि, बिना सरकारी संरक्षण के इतने कम समय में इतने सारे पेड़ों का कटान और परिवहन संभव नहीं है।एक तरफ सरकार वृक्षारोपण अभियान चलाकर करोड़ों पेड़ लगाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ भू-माफिया और लकड़ी तस्कर रक्षकों के साथ मिलकर पुराने पेड़ों का अस्तित्व मिटा रहे हैं। नीम और आम जैसे फलदार और औषधीय पेड़ों का इस तरह कत्लेआम न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है।
बताया जा रहा है कि, इस मामले में अभी तक किसी भी अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि, इस अवैध कटान की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी कर्मियों समेत माफियाओं पर कठोर कार्रवाई की जाए।
पर्यावरण, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक
नीम के पेड़ों का कटान पर्यावरण, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही ज्यादा हानिकारक सबित हो सकता है क्योंकि,नीम सबसे अधिक ऑक्सीजन छोड़ने वाले पेड़ों में से एक है। इसके कटने से हवा में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ेगी, जिससे ग्लोबल वार्मिंग और स्थानीय जलवायु असंतुलन पैदा होगा।नीम के पत्ते, छाल, और बीज एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर होते हैं। इनकी कमी से पारंपरिक स्वास्थ्य उपचार प्रभावित होंगे। ये पेड़ वायु को शुद्ध करते हैं और धूल के कणों को सोखते हैं, जिनके हटने से सांस संबंधी रोगों में वृद्धि हो सकती है।नीम की जड़ें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती हैं। इसके कटने से मिट्टी का कटाव बढ़ सकता है और पक्षियों व कीटों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाता है।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर