खून के आंसू रो रहा किसान: जहरीले पानी से बंजर हुई जमीन, अब फैक्ट्री पर होगा आर-पार का संग्राम
बख्शी का तालाब। क्षेत्र में स्थित महींगवा और पहाड़पुर के ग्रामीण इन दिनों एक गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रहे हैं। आरोप है कि, क्षेत्र में संचालित 'पुरुषोत्तम राम फूड्स' (ग्लूकोज फैक्ट्री) द्वारा फैलाया जा रहा रासायनिक प्रदूषण अब रिहायशी इलाकों और दूर-दराज के गांवों तक पहुंच गया है। भारतीय किसान यूनियनने इस मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है और फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी ह
lucknow
2:07 PM, May 3, 2026
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टैंकरों से गांव-गांव बहाया जा रहा रासायनिक जहर सौ0 bma7.in
बख्शी का तालाब। क्षेत्र में स्थित महींगवा और पहाड़पुर के ग्रामीण इन दिनों एक गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रहे हैं। आरोप है कि, क्षेत्र में संचालित 'पुरुषोत्तम राम फूड्स' (ग्लूकोज फैक्ट्री) द्वारा फैलाया जा रहा रासायनिक प्रदूषण अब रिहायशी इलाकों और दूर-दराज के गांवों तक पहुंच गया है। भारतीय किसान यूनियनने इस मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है और फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
स्थानीय ग्रामीणों और किसान नेताओं का आरोप है कि फैक्ट्री प्रशासन अपनी लागत बचाने के लिए मानकों को ताक पर रख रहा है। फैक्ट्री से निकलने वाला काला और दुर्गंधयुक्त रासायनिक पानी टैंकरों में भरकर रात के अंधेरे में बाहरी गांवों के खेतों और खाली जमीनों पर बहाया जा रहा है। इससे न केवल खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं, बल्कि आने वाले कई वर्षों के लिए उपजाऊ भूमि के बंजर होने का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पानी इतना जहरीला है कि इसके संपर्क में आते ही पालतू जानवर बीमार पड़ रहे हैं।
पहाड़पुर, अतरौरा और पुर जैसे गांवों की स्थिति और भी बदतर है। फैक्ट्री की चिमनियों से निकलने वाला काला धुआं और खुले में बहते केमिकल के कारण हवा और पानी दोनों जहरीले हो चुके हैं। क्षेत्र के बच्चों और बुजुर्गों में दमा, सांस लेने में तकलीफ और त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, भूजल भी दूषित हो चुका है, जिससे पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है।
भारतीय किसान यूनियन के जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदूषण विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से फैक्ट्री मालिक की मुट्ठी में है। भाकियू नेताओं का कहना है कि कई बार शिकायत करने और प्रदूषण विभाग द्वारा नमूने लेने के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसी "प्रशासनिक साठगांठ" के विरोध में भाकियू ने 3 मई को फैक्ट्री गेट पर विशाल धरने का आह्वान किया है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि जब तक फैक्ट्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती और जहरीले पानी का निकास बंद नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
पूर्व में स्थानीय विधायक योगेश शुक्ला ने भी फैक्ट्री का निरीक्षण किया था और वहां फैली गंदगी व दुर्गंध पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने प्रबंधन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। फैक्ट्री की इस "तानाशाही" ने अब क्षेत्र के हजारों किसानों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस जन आक्रोश को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर