काकोरी में दिन के उजाले में धराशायी हुए दर्जनों प्रतिबंधित आम के पेड़
काकोरी थाना क्षेत्र के जमालपुर गाँव में संतोष मैरिज लॉन से मात्र 500 मीटर की दूरी पर माफियाओं ने दर्जनों हरे-भरे और फलदार आम के पेड़ों पर आरा चलाकर उन्हें जमींदोज कर दिया।हैरानी की बात यह है कि यह पूरी कार्रवाई रात के अंधेरे में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में अंजाम दी गई। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने वन विभाग और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। बिना किसी विभागीय अ
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1:23 PM, May 7, 2026
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काकोरी में दिन के उजाले में धराशायी हुए दर्जनों प्रतिबंधित आम के पेड़ संकेतिक फोटो सौ0 bma7.in
लखनऊ। काकोरी थाना क्षेत्र के जमालपुर गाँव में संतोष मैरिज लॉन से मात्र 500 मीटर की दूरी पर माफियाओं ने दर्जनों हरे-भरे और फलदार आम के पेड़ों पर आरा चलाकर उन्हें जमींदोज कर दिया।हैरानी की बात यह है कि यह पूरी कार्रवाई रात के अंधेरे में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में अंजाम दी गई। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने वन विभाग और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। बिना किसी विभागीय अनुमति के, कीमती लकड़ी को काटकर ठिकाने लगाने का खेल घंटों तक चलता रहा।
इस घटना से स्थानीय निवासियों और ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि वन विभाग और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा कटान संभव नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, लकड़ी माफिया लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं और कीमती लकड़ियों की तस्करी कर उन्हें ऊँचे दामों पर बेच रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सूचना देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुँचने में देरी की, जिससे माफिया कटी हुई लकड़ी को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने में सफल रहे।
उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत आम, नीम और महुआ जैसी प्रतिबंधित प्रजातियों को काटने पर कड़ा प्रतिबंध है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी फलपट्टी क्षेत्र में हरे आम के पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। नियमानुसार, यदि कोई पेड़ बीमार या सूख गया है, तो उसे काटने के लिए भी वन विभाग से लिखित अनुमति और संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य होती है। जमालपुर की इस घटना में इन सभी नियमों को ठेंगा दिखाया गया है।
यह घटना न केवल पर्यावरणीय क्षति है, बल्कि प्रशासनिक विफलता का भी जीवंत उदाहरण है। जब उत्तर प्रदेश सरकार वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तब काकोरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में दर्जनों पेड़ों का काटा जाना एक बड़ी चुनौती पेश करता है।
जमालपुर में हुए इस 'ग्रीन मर्डर' के बाद अब सबकी नज़रें प्रशासन पर टिकी हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्यवाही नहीं की गई, तो फलपट्टी क्षेत्र का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि, यदि लकड़ी माफियाओं और उनके मददगार अधिकारियों पर शिकंजा नहीं कसा गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर