यूपी विधान परिषद में नियम 110 के अनुसार महत्वपूर्ण कदम उठाने की मांग
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की बैठक में आज विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने आज सदन में नियम ११० के अंतर्गत कॉर्पस फण्ड को लेकर हुए भ्रम की स्थिति के निवारण तथा आर०डब्लू०ए० और प्राधिकरण के बीच उत्पन्न हुए भ्रम/विवाद के समाधान कराये जाने के लिए चर्चा / वक्तव्य की मांग करता हूँ। ताकि सरकार की मंशा के अनुरूप सुव्यवस्थित शहरीकरण को बढ़ावा मिल सके,सभापति जी ने सरकार को प्रभावी कार्यवाही के निर्देश दिए
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5:06 PM, Feb 11, 2026
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यूपी विधान परिषद में नियम 110 के अनुसार महत्वपूर्ण विधायी कदम by- bma7.in
उत्तर प्रदेश।लखनऊ।उत्तर प्रदेश विधान परिषद की बैठक में आज विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने आज सदन में नियम ११० के अंतर्गत कॉर्पस फण्ड को लेकर हुए भ्रम की स्थिति के निवारण तथा आर०डब्लू०ए० और प्राधिकरण के बीच उत्पन्न हुए भ्रम/विवाद के समाधान कराये जाने के लिए चर्चा / वक्तव्य की मांग करता हूँ। ताकि सरकार की मंशा के अनुरूप सुव्यवस्थित शहरीकरण को बढ़ावा मिल सके,सभापति जी ने सरकार को प्रभावी कार्यवाही के निर्देश दिए।
जनकल्याण समितियां, रेसिडेंट वेल्फेयर एसोशिएसन बने
शहरी विकास को लेकर संजीदा सरकार मुख्यमंत्री शहरी विस्तारिकरण योजना / नये शहर प्रोत्साहन योजना को अमली जामा पहनाते हुए विभिन्न प्राधिकारी क्षेत्रों में नयी आवासीय कालोनियां विकसित कर रही है, लोगों को बेहतर आवास मिले इस दिशा में कार्य भी हो रहा है। बड़े-बड़े अर्पाटमेंट बनाये जा रहे है। इनके रख रखाव के लिए जनकल्याण समितियां, रेसिडेंट वेल्फेयर एसोशिएसन बने है। फ्लैटों में रहने वाले आवंटियों के कॉर्पस फण्ड को लेकर कई जगह विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। गाजियाबाद, बरेली, नोएडा सहित कई महानगरों में रेसिडेंट वेल्फेयर एसोशिएसन और प्राधिकरण के बीच में इसको लेकर भ्रम की स्थिति बनी है। लखनऊ में तो बैठक करके गोमतीनगर विस्तार के हजारों आवंटियों ने इसे वित्तीय धोखधड़ी की संज्ञा देते हुए प्रशासनिक कार्यवाही की ओर अग्रसर हुए है।
कॉर्पस फण्ड के एफ०डी० के कागजात हर अर्पाटमेंट के आर०डब्लू०ए० के पास मौजूद,मगर खातों से धनराशि नदारद
आवंटियों का कहना है कि, कॉर्पस फण्ड के एफ०डी० के कागजात हर अर्पाटमेंट के आर०डब्लू०ए० के पास मौजूद है। लेकिन सम्बंधित खातों से धनराशि नदारद है। स्वाभाविक है कि जब कॉर्पस फण्ड की एफ०डी० हुई थी और वह आर०डब्लू०ए० के पास मौजूद है तो फिर वह रकम कैसे प्राधिकरण के खाते मे चली गयी, यह लोग पूछ रहे है। फण्ड के सही इस्तेमाल के लिए हर सोसाइटी में कमेटी गठित करके इसका नियोजन किया जाना था पर यह कार्य भी लम्बित है। अब जब सभी जगाहों पर आर०डब्लू०ए० के लोग सक्रिय है तो सवाल यह उठता है कि आखिर यह कॉर्पस फण्ड और इसके असल उपयोगकर्ता के लोगों के बीच समन्वय स्थापित करके यह कार्य पूर्ण क्यों नही किया गया? जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है। लोक महत्व के इस आविलम्बनीय विषय कॉर्पस फण्ड को लेकर हुए भ्रम की स्थिति के निवारण तथा आर०डब्लू०ए० और प्राधिकरण के बीच उत्पन्न हुए भ्रम/विवाद के समाधान कराये जाने के लिए चर्चा / वक्तव्य की मांग करता हूँ। ताकि सरकार की मंशा के अनुरूप सुव्यवस्थित शहरीकरण को बढ़ावा मिल सके।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर