गोमती नदी में फेंकी गई मरी मछलियां तालाब से लायी गई
लखनऊ के बख्शी का तालाब इलाके के इटौंजा स्थित हीरापुरवा के पास गोमती नदी में मरी मछलियां पास के गांव अकडरिया से लायी गई थी। मत्स्य पालक किसान रुपन की बेटी ने मछलियों को लेकर हंगामा बढ़ने की स्थित में कैबिनेट मंत्री मत्स्य डॉ संजय कुमार निषाद के सामने आकर यह स्वीकार कर किया है। उसने बताया कि,उसके पिता को पटटे में मिले पोखर में मछली पालन किया गया था। जो कि अकड़रिया गांव के बीच में है। इसी तालाब में प
lucknow
8:12 PM, Mar 24, 2026
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उत्तर प्रदेश। लखनऊ के बख्शी का तालाब इलाके के इटौंजा स्थित हीरापुरवा के पास गोमती नदी में मरी मछलियां पास के गांव अकडरिया से लायी गई थी। मत्स्य पालक किसान रुपन की बेटी ने मछलियों को लेकर हंगामा बढ़ने की स्थित में कैबिनेट मंत्री मत्स्य डॉ संजय कुमार निषाद के सामने आकर यह स्वीकार कर किया है। उसने बताया कि,उसके पिता को पटटे में मिले पोखर में मछली पालन किया गया था। जो कि अकड़रिया गांव के बीच में है। इसी तालाब में पूरे गांव का गंदा पानी आता है। इसकी वजह से रविवार को मछलियों के मरने का सिलसिला चालू हुआ। जो कि सोमवार तक चलता रहा। इस दौरान उसने छोटी नाव से लगभग दो कुंतल मछलियों का निकालकर साइकिल ठेलिया द्वारा गोमती नदी तक पहुंचा दिया और वहां पर पानी में फेंक दिया।
गोमती नदी से निकालकर बाहर दबाई गई मछलियों को निवाला बनाते आवारा कुत्ते
पुलिस और मत्स्य विभाग की टीम ने विभागीय मंत्री के निरीक्षण के पहले गोमती से मछलियों को निकलवाकर पास ही गढढे में दबवा दिया।लेकिन जब विभागीय मंत्री मौके पर पहुंचे उस समय भी आवारा कुत्ते गढढे में दबाई गई मछलियों को खोदकर अपना पेट भरते देखे गए।जबकि गोमती के तेल बहाव में भारी मात्रा में मछलियां पानी में बहकर दूर निकल गई।
गोमती नदी नही तालाब में प्रदूषण से मरी मछलियां
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कैबिनेट मंत्री ने बताया कि,मछलियों की मौत प्रदूषण से हुई है। इसके लिए बोर्ड की टीम को तालाब,नदी से पानी का सैम्पल लेने के लिए कहा गया है। इसकी जांच करवाई जाएगी। इसके आलावा कठवारा गांव के पास ककरहा बाबा शिव मंदिर के पास थाई नूडल्स फैक्ट्री द्वारा विषैला पानी शिव मंदिर परिसर में फैलाया जा रहा है। वहां पर भी फैक्ट्री के भरे पानी का सैम्पल इकटठा करने का निर्देश दिया गया।
सभी मत्स्य पटटा धारकों का प्रशिक्षण जरूरी—डॉ संजय कुमार निषाद
कैबिनेट मंत्री डॉ संजय कुमार निषाद ने विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देशित किया है कि,प्रदेश में सभी पटटा धारक मत्स्य पालकों के लिए छह माह में एक बार प्रशिक्षण अनिवार्य करें। इसके साथ ही विभागीय हैचरियों से ही मछली बीज न लेकर बाहर से लेने वालों पर सख्ती करने की बात भी कही है।मौके पर मौजूद मत्स्य पालकों को उन्होने मछली पालन के टिप्स भी दिए।है। उन्होने कहा कि तालाब के आसपास ऐसी खेती को अपनाया जाए जिससे जल प्रदूषण को रोका जाए।

लेखक के बारे में
अनिल कुमार सिंह
वरिष्ठ संवाददाता