झूठी SC-ST एक्ट लगवाने ,गवाही देने पर आपराधिक मुकदमा और भारी जुर्माना,इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक सख्ती दिखाते हुए SC/ST एक्ट के दुरुपयोग पर मुआवज़ा वापसी का आदेश दिया। बताया जा रहा है कि, झूठी अपील करने वालों पर 5 लाख का जुर्माना लगाया और साफ चेतावनी दी कि, फर्जी एफआईआर व सरकारी धन की लूट पर IPC/BNS के तहत आपराधिक कार्रवाई होगी। अदालत ने इसे राज्य के साथ धोखाधड़ी और कानून का घोर दुरुपयोग बताया।
allahabad
12:56 PM, Feb 12, 2026
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उत्तर प्रदेश।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक सख्ती दिखाते हुए SC/ST एक्ट के दुरुपयोग पर मुआवज़ा वापसी का आदेश दिया। बताया जा रहा है कि, झूठी अपील करने वालों पर 5 लाख का जुर्माना लगाया और साफ चेतावनी दी कि, फर्जी एफआईआर व सरकारी धन की लूट पर IPC/BNS के तहत आपराधिक कार्रवाई होगी। अदालत ने इसे राज्य के साथ धोखाधड़ी और कानून का घोर दुरुपयोग बताया।
कोर्ट में देरी पर फैसला सही
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला देर से आया। पर सही दिशा में आया। सवाल सीधा है—जब कानून सबके लिए समान है, तो SC/ST एक्ट अलग और विशेष क्यों? क्या संविधान “एक वर्ग विशेष” के लिए अलग न्याय व्यवस्था की अनुमति देता है? सामान्य नागरिक वर्षों कोर्ट में घिसे, और एक वर्ग को FIR के साथ ही मुआवज़ा—यह न्याय नहीं, यह खुला तुष्टीकरण है।
सत्य देखकर होगा न्याय
हाई कोर्ट ने झूठे केस, चरित्र हत्या, ब्लैकमेलिंग और सरकारी धन की लूट—यह “सामाजिक न्याय” नहीं, बल्कि संगठित दुरुपयोग है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया कि, कानून की ढाल बनाकर अपराध नहीं चलेगा। अब समय है कि, इस कानून की संरचना पर पुनर्विचार का न्याय वर्ग देखकर नहीं, सत्य देखकर होना चाहिए। वही दूसरी ओर अलग कानून और अलग धन लोकतंत्र नहीं, वोट बैंक की राजनीति है। जिसे कठोरता से खत्म करना होगा।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर