दहेज को लेकर एक बार फिर देश की बेटी प्रताड़ित,महिला ने भाग कर बचाई जान
बाराबंकी जिले के लखपेड़ाबाग स्थित सरस्वती विहार कॉलोनी में दहेज के लिए एक महिला के साथ गंभीर मारपीट और प्रताड़ना की घटना सामने आई है। पीड़ित महिला ने अपनी सास, ससुर और ननद पर मारपीट कर उसे लहूलुहान करने और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
barabanki
5:46 PM, Apr 19, 2026
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दहेज के लिए एक महिला के साथ गंभीर मारपीट और प्रताड़ना sketch by- google
उत्तर प्रदेश।बाराबंकी जिले के लखपेड़ाबाग स्थित सरस्वती विहार कॉलोनी में दहेज के लिए एक महिला के साथ गंभीर मारपीट और प्रताड़ना की घटना सामने आई है। पीड़ित महिला ने अपनी सास, ससुर और ननद पर मारपीट कर उसे लहूलुहान करने और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप
बताया जा रहा है कि,महिला के सास, ससुर और ननद पर प्रताड़ना का आरोप है और ससुराल पक्ष द्वारा लगातार अतिरिक्त पैसों और दहेज की मांग की जा रही थी।विरोध करने पर महिला को बुरी तरह पीटा गया, जिससे वह लहूलुहान हो गई।घायल महिला को उसके पति ने अस्पताल में भर्ती कराया है।
पिता ने अपनी बेटी के लिए उठाई आवाज
बाराबंकी पुलिस को दी गई शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। दहेज प्रताड़ना के मामलों में भारतीय कानून के तहत कड़ी सजा के प्रावधान हैं।पीड़िता के पिता ने अपनी बेटी को लहूलुहान करने वाले सास, ससुर और ननद के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की है।पीड़िता और उसके बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन से मदद मांगी गई है।
न्याय की लगाई गुहार
दहेज प्रतिषेध अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की गई है।पीड़ित पक्ष का कहना है कि,उन्होंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दहेज दिया था, इसके बावजूद बार-बार की जा रही पैसों की मांग और शारीरिक हिंसा को बंद कर उन्हें न्याय दिलाया जाए।
दहेज प्रथा का विरोध
स्थानीय निवासियों का कहना है कि शिक्षित समाज में भी इस तरह की घटनाएं मानवता को शर्मसार करने वाली हैं। लोगों ने मांग की है कि दहेज के लालचियों के खिलाफ सख्त उदाहरण पेश किया जाना चाहिए।सोशल मीडिया पर लोगों का मानना है कि, भारतीय न्याय संहिता , के तहत ऐसे मामलों में त्वरित न्याय होना चाहिए ताकि, अन्य परिवारों को सबक मिल सके।
महिला सुरक्षा पर सवाल
सरस्वती विहार जैसी कॉलोनियों में हुई इस घटना ने स्थानीय स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा और पड़ोसियों की भूमिका पर भी चर्चा छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना केवल परिवार नहीं बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है।स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि, पुलिस बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच करेगी।
सामाजिक प्रभाव
बाराबंकी के जागरूक नागरिकों का मानना है कि केवल कानून से नहीं, बल्कि सामाजिक बहिष्कार और जागरूकता से ही ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।जनता पीड़िता के साहस की सराहना कर रही है कि उसने चुप रहने के बजाय विरोध किया और न्याय की गुहार लगाई। "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" के दौर में दहेज के लिए बेटियों को लहूलुहान करना कतई स्वीकार्य नहीं है।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर