CM ने भारतेंदु नाट्य अकादमी में 5 से 12 अप्रैल तक चलने वाले स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह का किया शुभारंभ
।लखनऊ सीएम योगी ने भारतेंदु नाट्य अकादमी में 5 से 12 अप्रैल तक चलने वाले स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह का रविवार को शुभारंभ किया। उन्होंने कई प्रेरक बातें कहीं तो आईना भी दिखाया और चिंता भी व्यक्त की। सीएम ने अकादमी के अध्यक्ष की मांगों पर सरकार की ओर से आश्वस्त किया। अपर मुख्य सचिव से कहा कि छात्रावास बनाकर भारतेंदु नाट्य अकादमी को हैंडओवर करें। वह इसे एकेडमी के अंदर ही चलाएं।
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4:46 PM, Apr 5, 2026
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समाज का दर्पण है रंगमंच, जनचेतना बनकर समाज को नई दिशा देता है अभिनय सौ0 bma7.in
उत्तर प्रदेश।लखनऊ सीएम योगी ने भारतेंदु नाट्य अकादमी में 5 से 12 अप्रैल तक चलने वाले स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह का रविवार को शुभारंभ किया। उन्होंने कई प्रेरक बातें कहीं तो आईना भी दिखाया और चिंता भी व्यक्त की। सीएम ने अकादमी के अध्यक्ष की मांगों पर सरकार की ओर से आश्वस्त किया। अपर मुख्य सचिव से कहा कि छात्रावास बनाकर भारतेंदु नाट्य अकादमी को हैंडओवर करें। वह इसे एकेडमी के अंदर ही चलाएं। संस्कृति विभाग अन्य प्रस्तावों को भी आगे बढ़ाएगा। सीएम ने पद्म पुरस्कार के लिए डॉ. अनिल रस्तोगी को बधाई दी। सीएम ने कहा कि 1976 में देश जब आपातकाल से गुजर रहा था, तब भी भारतेंदु नाट्य अकादमी अपने पाठ्यक्रम को संचालित कर रहा था।
सीएम ने बंगाल की त्रासदी और कोरोना पर सरकार की सकारात्मक पहल की भी चर्चा की
सीएम ने आनंदमठ उपन्यास पर आधारित नाट्य मंचन की प्रस्तुति करने वाले कलाकारों की तारीफ की। सीएम ने कहा कि वंदे मातरम गीत बताता है कि राष्ट्रभक्ति व स्वराज का महत्व क्या है। सीएम ने कहा कि विदेशी हुकूमत ने बंगाल के अकाल को हल्केपन से लिया था, लोग भूखों मर रहे थे। स्पेनिश फ्लू का शिकार हो रहे थे, लेकिन अंग्रेज सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही थी। 1921 के जनगणना के आंकड़े रोंगटे खड़े करने वाले थे। उस दशक में भारत की आबादी बढ़ने की बजाय घटी। 30 करोड़ से कम आबादी वाले भारत में स्पेनिस फ्लू के कारण तीन करोड़ से अधिक लोग मरे थे, विदेशी हुकूमत तब भी लगान, लूट व अत्याचार कर रहा था। वहीं सीएम ने कोरोना महामारी के हालात का जिक्र करते हुए सरकार के सकारात्मक रवैये को भी गिनाया। कहा कि जब सरकार में संवेदना होती है तो वह लड़ते-लड़ते बीमारी को भी भगा देती है। सरकार जब संवेदनाओं से भरपूर होती है तो नागरिकों के हितों की रक्षा करती है। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने बंगाल के अकाल-त्रासदी को लेकर यह उपन्यास रचा था। उसके बाद अलग-अलग कालखंड में देश को त्रासदी झेलनी पड़ी, लेकिन सरकार के स्तर पर प्रयास नहीं हुए। सीएम ने कहा कि अकाल में बंगाल और वहां के लोगों की स्थिति का दर्द इस उपन्यास में बयां किया गया।
एक समय संस्थानों पर ऐसे लोगों का कब्जा था, जो पेशेवर गुंडों को नायक के रूप में प्रस्तुत करते थे
सीएम योगी ने कहा कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर पूरे देश में समारोह हो रहा है। भारतेंदु नाट्य अकादमी को भी हर जनपद में वंदे मातरम की प्रस्तुति करनी चाहिए। इसकी समयावधि 15 मिनट की बजाय दो घंटे होनी चाहिए, जिससे लोग उस क्रूरता व त्रासदी के बारे में देखें। सीएम ने कहा कि हम अपने नायकों को सम्मान देने में परहेज करते हैं। यही कारण है कि एक समय हमारे संस्थानों पर ऐसे लोगों का कब्जा हो गया था, जो पेशेवर गुंडे और माफिया को नायक के रूप में प्रस्तुत करते थे, समाज के सही नायकों को खलनायक के रूप में प्रस्तुत करने की जो प्रवृत्ति थी, उसका परिणाम हुआ कि समाज में उसी प्रकार के चरित्र आते दिखाई दिए।
परंपरा, संस्कृति व विरासत को सम्मान देना जानता है भारतीय समाज
सीएम योगी ने कहा कि आज जब सिनेमा व रंगमंच अच्छा प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है तो समाज भी उस अच्छाई को लेता है। यह समाज की संवेदना है कि रामायण दुनिया का सबसे लोकप्रिय सीरियल हुआ है। भारतीय समाज परंपरा, संस्कृति व विरासत को सम्मान देना जानता है। सीएम ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किए गए सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की तारीफ की और कहा कि शुक्रवार को वाराणसी में इसे देखने का अवसर प्राप्त हुआ। हम भी महाराज सुहेलदेव, रानी लक्ष्मीबाई, महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह, 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर के नायकों पर स्थानीय स्तर पर नाट्य श्रृंखला प्रारंभ कर कलाकारों को प्रेरित करें। संवाद, संगीत, स्क्रिप्ट, शब्दों का चयन, वाक्य विन्यास इतना प्रभावी हो, जो सभी को आकर्षित करे। ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ेंगे।
अब सालार मसूद नहीं, बल्कि महाराज सुहेलदेव के स्मारक पर जाती है भीड़
सीएम ने कहा कि रामायण, महाभारत भारत की दिनचर्या और सांस्कृतिक प्रवाह का हिस्सा है, लेकिन अन्य नायकों को कौन ढूंढेगा। सीएम योगी ने स्कूलों-कॉलेजों में रानी लक्ष्मीबाई, महाराज सुहेलदेव आदि की प्रस्तुति को नाटक के माध्यम से प्रस्तुत करने पर बल दिया। सीएम ने एक हजार वर्ष पहले महाराज सुहेलदेव के शौर्य व पराक्रम का जिक्र किया। कहा कि महाराज सुहेलदेव ने सालार मसूद को जिस निर्ममता से मारा, उस कारण 150 वर्ष तक भारत पर कोई विदेशी आक्रांता ने हमला करने का दुस्साहस नहीं किया, लेकिन भारतीय समाज ने उन्हें भुला दिया। 1000 वर्ष पश्चात हमारी सरकार को यह गौरव प्राप्त है कि हम सुहेलदेव का स्मारक बना सके। सीएम ने गुलामी की दासता पर चिंता जताई और कहा कि जिस स्थान पर महाराज ने सालार समूद को मारा, वहां सालार मसूद का मेला लगता था, लेकिन महाराज सुहेलदेव का स्मरण कोई नहीं करता था। जब मैं गोरखपुर का सांसद था तो बहराइच में उनके विजयोत्सव कार्यक्रम में आया। प्रशासन ने मुझे रोकने का प्रयास किया, फिर भी मैं गया था। जिस सालार मसूद ने हमें रौंदने का कार्य किया, पहले उसके मेले में बड़ी संख्या में लोग जाते थे परंतु अब भीड़ सालार मसूद की तरफ नहीं झांकती, बल्कि महाराज सुहेलदेव के स्मारक पर जाती है। सालार मसूद भी अभी मिट्टी में मिले माफिया का रूप था। इसने न सिर्फ सोमनाथ मंदिर, बल्कि राम जन्मभूमि को पहली बार क्षतिग्रस्त किया। महाराजा सुहेलदेव ने उसे वह मौत मारा, जिसे इस्लाम में सबसे खराब मौत मानी जाती है। महाराज सुहेलदेव ने सालार मसूद को जहन्नुम में भेजने की गारंटी दी थी। जब तक अत्याचारी के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करेंगे, तब तक वह भारत की संस्कृति पर प्रहार करता रहेगा। अवधी-भोजपुरी में थोड़ा-बहुत छोड़ दें तो महाराज सुहेलदेव के नाम पर कोई गीत, संगीत व नाट्य प्रस्तुति नहीं होती।
देश के नायकों पर बनाएं लघु नाटक
सीएम ने वीरांगना अवंतीबाई, झलकारी बाई, ऊदा देवी, महाराज बिजली पासी, पं. रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखऱ आजाद आदि नायकों के किस्से सुनाए और कहा कि नाट्य अकादमियों का दायित्व है कि इन पर लघु नाटक बनाएं। जब कोई समय आता है तो हम इन्हें स्मरण करते हैं, फिर भूल जाते हैं। जिन खलनायकों ने भारत की संस्कृति को रौंदने का कार्य किया, उन्हें कभी सम्मान नहीं मिलना चाहिए। बंगाल की त्रासदी को बंकिम चंद्र चटर्जी आनंद मठ के रूप में बताते हैं, लेकिन सुहेलदेव को सम्मान देने के लिए कोई बंकिम चंद्र यहां पैदा नहीं हो पाए। रानी लक्ष्मीबाई पर काव्यपाठ के माध्यम से प्रस्तुति हुई है, लेकिन रंगमंच से यह प्रस्तुति हो तो और भी प्रभावी हो सकती है। भारतेंदु नाट्य अकादमी को इस पर कार्य करने की आवश्यकता है।
आधुनिक हिंदी के प्रणेता थे भारतेंदु हरिश्चंद्र
सीएम योगी ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी के प्रणेता थे। काशी नागरी प्रचारिणी सभा आधुनिक हिंदी की जननी रही है। स्वदेशी भाषा व इसका मतलब क्या होना चाहिए, काशी नागरी प्रचारिणी सभा उसका माध्यम बनी थी। सभा ने जिस जनचेतना को बढ़ाने का कार्य किया, वह अद्भुत था। उन्होंने साहित्यिक कृतियों के माध्यम से जनचेतना का जागरण किया था। संस्कृति विभाग को काशी नागरी प्रचारिणी के पुनरुद्धार पर भी सोचना चाहिए। 1881 में भारतेंदु हरिचंद्र का नाटक अंधेर नगरी ब्रिटिश हुकूमत की संवेदनहीनता का प्रमाण है। उन्होंने 1875 पर भारत दुर्दशा पर भी नाटक लिखा था। जयशंकर प्रसाद का नाटक स्कंदगुप्त (1928) व चंद्रगुप्त (1931) सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना को जागृत करने का सशक्त माध्यम बना। देश की गुलामी के समय सच बोलने-करने का साहस साहित्यिक कृति के माध्यम से किया था। चंद्रगुप्त का प्रसिद्ध गीत अरुण यह मधुमय देश आज भी हर भारतीय गाता है।
कला की सभी विधाओं में उत्तर प्रदेश अत्यंत समृद्ध
सीएम ने कहा कि गोरखपुर में कलाकारों के लिए सरकार ने प्रेक्षागृह बनाया है। कहा कि कार्मल स्कूल के पास एक बरगद का पेड़ है। 1975 से 12-15 कलाकार लगातार उस पेड़े के नीचे सर्दी, गर्मी, बरसात हर मौसम में सप्ताह में एक दिन मंचन करते थे। मैं आज भी उन कलाकारों को कभी-कभी बुलाता हूं। सीएम ने कहा कि गायन, वादन, नाट्य, नृत्य आदि विधा में उत्तर प्रदेश बहुत समृद्ध रहा है। आजमगढ़ के हरिहरपुर गांव का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि उस छोटे से गांव में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक आज भी संगीत के साथ जुड़े हैं। हमारी सरकार ने वहां संगीत विद्यालय प्रारंभ किया। मगहर में कबीर एकेडमी में बनी, कबीर की साखी पर आधारित कार्यक्रम होने चाहिए। सीएम ने शोध पर भी जोर दिया। विभाग का काम ठेके पट्टे करना नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के लिए समृद्ध विरासत को बढ़ाने की आवश्यकता है।
24 से रामधारी सिंह दिनकर की कृतियों पर त्रिदिवसीय आयोजन होगा
सीएम ने कहा कि सदन में मैं रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं की पंक्तियों को उठाने का प्रयास करता हूं। उनकी रचना ‘सिंहासन खाली करो, जनता आती है’ ने आपातकाल के दौरान समाज की जनचेतना को जागरूक किया। सीएम ने बताया कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कृतियों पर आधारित त्रिदिवसीय कार्यक्रम 24 से लखनऊ में होगा। एक दिन अटल जी की साहित्यिक कृतियों पर आधारित रंगमंच का कार्यक्रम होना चाहिए। हमारे पास बहुत कुछ है, हमें बस युवाओं व वर्तमान पीढ़ी को तैयार करने के लिए कार्य करना होगा।
मॉरीशस का सुनाया संस्मरण, बोले- वहां भी घर-घर में पूजी जाती है रामचरित मानस
सीएम ने भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा निज भाषा-बोली के महत्व पर प्रकाश डाला। मातृभाषा हिंदी, खड़ी बोली के लिए उनका योगदान अविस्मरणीय है। तुलसीदास जी पर ईश्वरीय प्रेरणा हुई तो उन्होंने अवधी में रामचरित मानस रच डाली, जो घर-घर में पूजी जा रही है। सीएम ने मॉरीशस यात्रा का संस्मरण सुनाया और कहा कि वहां भारतीय मूल के लोगों ने विरासत में रामचरित मानस दिखाई। बताया कि रामायण की पूजा करते हैं।
राजनीतिक कारणों से महापुरुषों को भुला दिया गया
सीएम ने कहा कि वंदे मातरम के साथ ही हमारा प्रयास होना चाहिए, जिन महापुरुषों को राजनीतिक कारणों से भुला दिया गया। वोटबैंक पर असर न पड़े, इसलिए महाराज सुहेलदेव, बिजली पासी, रानी लक्ष्माबाई का स्मरण नहीं किया जाता था। हमें नायकों व वीरांगनाओं को सम्मान देना चाहिए। स्थानीय स्तर पर स्कूलों, विद्यालयों में तय हो कि सप्ताह में एक दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोककलाओं को बढ़ाने का कार्यक्रम होना चाहिए। भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रतिशंकर त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया।इस दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, पर्यटन-संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक योगेश शुक्ल, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह समेत अनेक रंगकर्मी, पूर्व छात्र आदि मौजूद रहे।

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