इटौंजा में भू-माफियाओं का दुस्साहस, प्रशासनिक दावों के बीच रातभर चला मिट्टी का अवैध धंधा
बख्शी का तालाब हसील के अंतर्गत आने वाले इटौंजा थाना क्षेत्र का है, जहाँ बीती रात भू-माफियाओं ने सरकारी गाइडलाइंस को पूरी तरह दरकिनार करते हुए मिट्टी के अवैध उत्खनन को अंजाम दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल को इतनी चालाकी से अंजाम दिया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है, जबकि संबंधित विभाग मौन साधे हुए हैं।
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1:11 PM, May 17, 2026
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प्रशासनिक दावों के बीच रातभर चला मिट्टी का अवैध धंधा संकेतिक फोटो सौ0 bma7.in
लखनऊ। बख्शी का तालाब हसील के अंतर्गत आने वाले इटौंजा थाना क्षेत्र का है, जहाँ बीती रात भू-माफियाओं ने सरकारी गाइडलाइंस को पूरी तरह दरकिनार करते हुए मिट्टी के अवैध उत्खनन को अंजाम दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल को इतनी चालाकी से अंजाम दिया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है, जबकि संबंधित विभाग मौन साधे हुए हैं।
स्थानीय चश्मदीदों और ग्रामीणों से मिली खुफिया जानकारियों के मुताबिक, अवैध खनन करने वाले सिंडिकेट ने अब अपनी रणनीति बदल ली है। दिन के उजाले में प्रशासनिक छापेमारी के डर से यह नेटवर्क पूरी तरह शांत रहता है, लेकिन जैसे ही घड़ी की सुइयां रात के 2 बजे को पार करती हैं, इटौंजा के सआदत नगर गढ़ा, नेवादा और माल रोड से जुड़े ग्रामीण अंचलों की तस्वीर बदल जाती है। सन्नाटे को चीरती हुई भारी पोकलेन और जेसीबी मशीनें खेतों में उतर जाती हैं। इसके बाद दर्जनों डंपरों और भारी-भरकम ट्रॉलियों के जरिए मिट्टी की ढुलाई का सिलसिला शुरू होता है, जो सुबह की पहली किरण निकलने तक बदस्तूर जारी रहता है।
इस पूरे अवैध कारोबार की सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई यह है कि माफिया अक्सर कानून की आँखों में धूल झोंकने के लिए 'वैधता का मुखौटा' पहनते हैं। सूत्रों के अनुसार, किसी स्थानीय ईंट-भट्ठे या छोटे विकास कार्य के लिए जारी किए गए एक सीमित सरकारी परमिट (रॉयल्टी पास) की आड़ में यह पूरा सिंडिकेट ऑपरेट होता है। इस एक परमिट की आड़ में सैकड़ों गुना अधिक मिट्टी अवैध रूप से खोदकर निजी रियल एस्टेट डेवलपर्स और अवैध कॉलोनाइजरों को ऊंचे दामों पर बेच दी जाती है। इससे सरकार को हर महीने लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।
खनन माफियाओं की इस मनमानी का सबसे बड़ा खामियाजा स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। भारी वाहनों की बेकाबू रफ्तार के कारण ग्रामीण इलाकों की नव-निर्मित सड़कें और संपर्क मार्ग पूरी तरह से उखड़ चुके हैं, जिससे राहगीरों का चलना दूभर हो गया है। इसके अलावा, वैज्ञानिक मानकों को ताक पर रखकर की जा रही बेतरतीब और गहरी खुदाई के कारण खेतों में 10 से 15 फीट गहरे जानलेवा दलदल जैसे गड्ढे बन चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आने वाले मानसूनी सीजन में ये गड्ढे जलभराव का कारण बनेंगे, जिससे मवेशियों और बच्चों के डूबने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा सवाल स्थानीय पुलिसिंग और राजस्व विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बिना स्थानीय शह के इतने बड़े पैमाने पर रातभर मशीनों का चलना मुमकिन नहीं है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि इस क्षेत्र पर अधिकारियों की नजर नहीं गई है। पूर्व में शिकायतों का अंबार लगने पर बीकेटी के उपजिलाधिकारी साहिल कुमार ने खुद एक गुप्त अभियान चलाकर एक बाग में अवैध खनन को रंगे हाथों पकड़ा था। उस दौरान दोषी भू-स्वामियों पर 5 लाख रुपये तक का हर्जाना ठोंका गया था और कई डंपर सीज किए गए थे। इसके बावजूद, कुछ समय की खामोशी के बाद यह सिंडिकेट दोबारा नए इलाकों में सक्रिय हो जाता है।
देर रात हुई इस बड़ी घटना के बाद अब इटौंजा के कई गांवों के निवासी लामबंद होने लगे हैं। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने चेतावनी दी है कि, यदि इस बार केवल खानापूर्ति करने के बजाय मुख्य सरगनाओं के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, तो वे मजबूरन तहसील मुख्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि लखनऊ का शीर्ष जिला प्रशासन इस संगठित अवैध कारोबार पर हमेशा के लिए लगाम लगाने में कितना कामयाब होता है।

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मुस्कान सिंह
रिपोर्टर