मलिहाबाद में निजी स्कूलों की मनमानी, कोर्स के नाम पर अभिभावकों के साथ कमीशन खोरी
लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में निजी स्कूलों द्वारा किताबों और ड्रेस के नाम पर की जा रही 'कमीशनखोरी' और 'मनमानी' का मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में है। बताया जा रहा है कि,अप्रैल 2026 के हालिया घटनाक्रम के अनुसार, जिलाधिकारी विशाख ने इन शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाया है। जिसको लेकर निजी स्कूल के पैरो के नीचे में जमीन हिलने वाली बात हो रही है।
lucknow
7:04 PM, Apr 17, 2026
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निजी स्कूलों द्वारा किताबों और यूनिफॉर्म के नाम पर मनमानी पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया sketch by- google
उत्तर प्रदेश। लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में निजी स्कूलों द्वारा किताबों और ड्रेस के नाम पर की जा रही 'कमीशनखोरी' और 'मनमानी' का मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में है। बताया जा रहा है कि,अप्रैल 2026 के हालिया घटनाक्रम के अनुसार, जिलाधिकारी विशाख ने इन शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाया है। जिसको लेकर निजी स्कूल के पैरो के नीचे में जमीन हिलने वाली बात हो रही है।
सख्त आदेश
लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि, कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।मलिहाबाद सहित पूरे जिले में एसडीएम , एसीएम और सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों की संयुक्त जांच टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें शिकायतों के आधार पर स्कूलों का औचक निरीक्षण कर रही हैं।
भारी जुर्माना
बताया जा रहा है कि,नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर ₹5 लाख तक का जुर्माना और बार-बार गलती करने पर मान्यता रद्द करने की चेतावनी दी गई है। सरकार ने निर्देश दिया है कि, जिन स्कूलों में एनसीआरटी पाठ्यक्रम लागू है, वहां केवल एनसीआरटी की सस्ती किताबें ही चलेंगी। निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें जबरन थोपना अवैध है।
आर्थिक शोषण का आरोप
जनता का मानना है कि निजी स्कूल शिक्षा को 'व्यापार' बना चुके हैं। अभिभावकों के अनुसार, कक्षा 1 तक की किताबों का सेट जो एनसीआरटी के अनुसार ₹800 के आसपास होना चाहिए, उसे निजी प्रकाशकों के माध्यम से ₹3,000 से ₹9,000 तक में बेचा जा रहा है।लोगों में इस बात को लेकर सबसे ज्यादा गुस्सा है कि, उन्हें एक विशेष दुकान से ही सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। आरोप है कि, इन दुकानों पर कोई छूट नहीं मिलती और स्कूल प्रबंधन को प्रति सेट 50-60% तक कमीशन मिलता है।कई अभिभावकों ने शिकायत की है कि, निर्धारित दुकानों पर महंगी किताबें खरीदने के बावजूद उन्हें पक्का बिल, (रसीद) नहीं दिया जाता है।जिससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान हो रहा है।
सामाजिक संगठनों का रुख
'सामाजिक न्याय महासभा' जैसे संगठनों ने मलिहाबाद एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर इन स्कूलों के खिलाफ औचक निरीक्षण और सख्त कार्रवाई की मांग की है।विरोध प्रदर्शनों के दौरान जनता ने पूरे देश में समान पाठ्यक्रम और सस्ती किताबों को अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग उठाई है।
स्थानीय स्तर पर स्कूलों का नाम
अभिभावकों ने विशेष रूप से सिद्धार्थ ग्लोबल, विद्यस्थली कनार, सफा स्कूल, और ज्ञानदीप इंटर कॉलेज जैसे स्कूलों का नाम लेकर प्रशासन से जांच की अपील की है। कुछ अभिभावकों का यह भी कहना है कि शिकायत करने पर बच्चों को स्कूल में मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का डर बना रहता है।
प्रशासन से जनता की अपेक्षाएं
जनता चाहती है कि, स्कूल अपनी फीस और किताबों की सूची वेबसाइट पर सार्वजनिक करें।केवल चेतावनी के बजाय, नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने और भारी जुर्माना लगाने की मांग की जा रही है।लोग मानते हैं कि, प्रशासन केवल सत्र की शुरुआत में सक्रिय होता है, जबकि इसकी निरंतर जांच होनी चाहिए। ताकि, स्कूलों की मनमानी पर स्थायी रोक लग सकेनता की स्पष्ट राय है कि, प्रशासन की 'सुस्ती' और स्कूलों की 'साठगांठ' के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अभिभावक अब ठोस धरातलीय कार्रवाई का इंतज़ार कर रहे है।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर