अनु हिमाचल प्रदेश पहुंची आर्यवर्धन को बचाने,क्या इन दोनो को मिलेगा इन प्यार या फिर यही खत्म हो जाएंगा इनका साथ
अनु और आर्यवर्धन की इस कहानी में एक नया मोड आ चुका है। एक तरफ अनु के मम्मी — पापा को इन दोनो के रिश्तो की सच्चाई पता चल चुकी है। वही दूसरी ओर आर्यवर्धन को आतंकवादियो ने किडनैप कर लिया है। अनु ने एक तरफ अपने परिवार का विश्वास खो दिया है वही अनु आर्यवर्धन के लिए बहुत ही ज्यादा परेशान हो रही है। सुबह शाम उसको एक ही बात की चिंता लगी रहती है कि,आर्यवर्धन कैसा होगा,उसने कुछ खाया — पिया होगा की नही।
lucknow
4:45 PM, Jan 24, 2026
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photo by - google
उत्तर प्रदेश। अनु और आर्यवर्धन की इस कहानी में एक नया मोड आ चुका है। एक तरफ अनु के मम्मी — पापा को इन दोनो के रिश्तो की सच्चाई पता चल चुकी है। वही दूसरी ओर आर्यवर्धन को आतंकवादियो ने किडनैप कर लिया है। अनु ने एक तरफ अपने परिवार का विश्वास खो दिया है वही अनु आर्यवर्धन के लिए बहुत ही ज्यादा परेशान हो रही है। सुबह शाम उसको एक ही बात की चिंता लगी रहती है कि,आर्यवर्धन कैसा होगा,उसने कुछ खाया — पिया होगा की नही। आर्यवर्धन के किडनैप होने की वजह से आर्यवर्धन के काम पर भी काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड रहा है। वही आर्यवर्धन का परिवार टूटता जा रहा है। अनु आर्यवर्धन को खोजने के लिए जाना चाहती है। लेकिन मीरा और झेंडे उसे साथ में नही ले जाना चाहते है। इसके अलावा,अनु का परिवार सच जानने के बाद अनु को नही भेजना चाहता है।
मीरा ने अनु को ऑफिस आने पर मारा थप्पड
अनु आर्यवर्धन की चिंता को लेकर ऑफिस जाती है। जहां पर पुलिस फोर्स की टीम के द्वारा एक टीम बनाई जाती है। जिसमें मीरा,झेंडे होते हैै। जिन्हे आर्यवर्धन को खोजने के लिए ( हिमाचल प्रदेश )कांगडा जाने को तैयार किया जाता है। अनु वहां पर पहुंचकर आर्यवर्धन को खोजने के लिए खुद को साथ ले जाने की बात कहती है। लेकिन मीरा अनु को थप्पड मार देती है। वही मीरा अनु को आर्यवर्धन की इस हालत का जिम्मेदार बताती है। मीरा कहती है कि,आर्यवर्धन के साथ जो कुछ भी होता है। उसकी जिम्मेदार यह अनु की होती है। मीरा अनु को ऑफिस से निकलने के साथ एक्शन लेने की बात कहती हैै। लेकिन अनु कहती है कि,जब आर्यवर्धन मिल जाएंगे। तब मैं ऑफिस से भी चली जाओगी और आर्यवर्धन की लाइफ से भी। मगर आर्यवर्धन के मिलने के बाद अभी मैं उनको खोजने के लिए जाना चाहती है। मीरा अनु पर काफी ज्यादा गुस्सा कर रही होती है। तभी झेंडे बीच में आ जाता है कि,अगर हम तुम्हें साथ में ले भी चले,मगर तुम्हरा परिवार तुम्हे जाने देगा। तब अनु चुपचाप वहां से चली जाती है।
अनु ने आर्यवर्धन को बचाने की पकडी जिद्द
आर्यवर्धन को खोजने के खोजने के लिए अनु को जाना होता है। इसीलिए वह अपने परिवार से कहती है कि,आर्यवर्धन ने हमेशा उसका साथ दिया है। जब — जब उसके परिवार को आर्यवर्धन की मदद की जरूरत हुई है। तब — तब आर्यवर्धन ने अपनी जान की परवाह किए बिना हमारी मदद की। लेकिन जब उनको हमारी जरूरत है। तब हम उन्हे ऐसा कैसे अकेला छोड सकते है। अनु रोेते हुए बताती है कि,मुझे पता है। जब से आप लोगो को मेरे और आर्यवर्धन के बीच के रिश्ते के बारे मे मालूम हुआ है। तब से आप लोगो की सोच आर्यवर्धन के प्रति बदल गयी है। मगर अगर आप लोगो को यह सब अभी मालूम नही हुआ होता है। तब भी आप लोग यही कहते कि,आर्यवर्धन को खोजने के लिए मत जाओ। अनु की इन सब बातो को लेकर भी उसकी कोई बात नही मानी जाती है। जिससे वह काफी ज्यादा दुखी होती है। उसके मन मे एक ही बात होती है कि,उसको कैसे भी आर्यवर्धन को बचाने के लिए जाना है। अनु छत पर जाकर अपनी सहेली से बात करती है कि,परिवार वाले उसको जाने नही दे रहे है।
झेंडे ने अनु को ले जाने की कही बात
अनु अपनी सहेली से बात कर ही रही होती है कि,आर्यवर्धन ने जो उसको एक ब्रशलेट दिया है वो इस समय काम नही कर रहा है। लेकिन जब वह आर्यवर्धन के पास होगी। तब वह ब्रशलेट जरूर काम करेंगे। अनु कहती है कि,उसका मन आर्यवर्धन उसको जरूर मिलेगा। अनु को लगाता है कि,आर्यवर्धन को सिर्फ अनु का बचा सकती है। तभी वहां पर झेंडं आ जाता है और कहता है कि,जो आर्यवर्धन ने तुम्हें ब्रशलेट दिया था। वह मुझे दे दो। ताकि,आर्यवर्धन को बचाने में मदद हो सके। लेकिन अनु कहती है कि,अगर आपको यह ब्रशलेट चहिए तो आपको मुझे अपने साथ लेकर जाना होगा। लेकिन झेंडे मना कर देता है कि,वहां पर बहुत ही ज्यादा खतरा होगा। अनु कहती है कि,मेरे आर्यवर्धन के बीच एक अनोखा रिश्ता है। हम दोनो एक दूसरे को महसूस कर सकते है। तभी तो कई बार उन्होने ने मेरी जान बचाई है। शायद इसी वजह से मैं भी कई बार उनकी जान बचा पायी हूं। लेकिन झेंडे अनु की बात को न ध्यान देते हुए। उससे ब्रशलेट लेकर चला जाता है। तभी जाते समय झेंडे को मौहल्ले के लोग मिलते है। जो आर्यवर्धन की फिक्र के साथ कह देते है कि,अनु का बस चले तो वह अभी जाकर आर्यवर्धन को बचा कर लाए। तब झेंडे को यह सब सुनकर पुरानी बात याद आती है और उसको अहसास हो जाता है कि,अनु की वजह से कई बार आर्यवर्धन की जान बची है।
अनु को परिवार से मिला जाने की मंजूरी
अनु अपनी सहेती से बोल रही होती है। अगर झेंडे उसे अपने साथ नही ले जाएंगे। तो वह अकेले ही आर्यवर्धन को बचाने के लिए चली जाएगी। वह अपनी सहेली से कांगडा के टिकट बुक करने को कहती है। उसकी सहेली उसको कहती है तुम पागल हो गयी हो। जो ऐसी बात कर रही है। तभी वहां पर झेंडे आ जाते है और कहते है कि,मैं तुमको साथ ले जाओगा। मगर परिवार की मर्जी होने चहिए।तब वह साथ में अनु के परिवार से बात करने जाता है। लेकिन अनु के पापा गोपाल झेंडे का अंदर आने से मना कर देते है और कहते है। अभी यह मुझे अपनी बेटी से बात करनी है। तब अनु अपने पापा से कहती है कि,आप लोग समझ क्यो नही रहे हो कि,मेरा वहां पर जाना कितना ज्यादा जरूरी है। तब अनु के पापा मान जाते है। मगर कहते है कि,जब तुम वापस आओगी। तब तुम वैसे ही करोगी जैसे मैं तुम्हे करने को कहूंगा। अनु मान जाती है। वह कहती है कि,अगर आर्यवर्धन की जान बचाने का यही रास्ता है तो मुझे हर शर्त मंजूर है।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर