राष्ट्रीय हड़ताल के तहत AICCTU का बीकेटी तहसील तक मार्च , रोजगार, समान वेतन और काम की गरिमा की मांग
सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा दिए गए राष्ट्रव्यापी हड़ताल के आह्वान के तहत आज ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (एआईसीसीटीयू) ने लखनऊ के बख्शी का तालाब तहसील तक विरोध मार्च आयोजित किया। मजदूरों, स्कीम कर्मचारियों, महिलाओं और छात्रों ने बड़ी संख्या में भाग लेते हुए सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ नारे लगाए और तहसील प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया है।
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4:32 PM, Feb 12, 2026
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राष्ट्रीय हड़ताल के तहत AICCTU का बीकेटी तहसील तक मार्च सौ0 bma7.in
उत्तर प्रदेश। लखनऊ।सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा दिए गए राष्ट्रव्यापी हड़ताल के आह्वान के तहत आज ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (एआईसीसीटीयू) ने लखनऊ के बख्शी का तालाब तहसील तक विरोध मार्च आयोजित किया। मजदूरों, स्कीम कर्मचारियों, महिलाओं और छात्रों ने बड़ी संख्या में भाग लेते हुए सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ नारे लगाए और तहसील प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया है।
कॉरपोरेट घरानों के हित में रोजगार गारंटी और श्रम सुरक्षा को खत्म कर रही सरकार
बताया जा रहा है कि, प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें थीं। जीआरएएमजी को वापस लिया जाए और मनरेगा को पुनः बहाल किया जाए। चारों श्रम कानूनों को निरस्त किया जाए, तथा अमेरिका और भारत के बीच हुए व्यापार समझौते को वापस लिया जाए।सभा को संबोधित करते हुए सीपीआई(एमएल) लखनऊ के इंचार्ज रामेश सिंह सेंगर ने कहा कि, “सरकार कॉरपोरेट घरानों के हित में रोजगार गारंटी और श्रम सुरक्षा को खत्म कर रही है। हम मनरेगा की बहाली और मजदूर विरोधी श्रम कानूनों की वापसी की मांग करते हैं।”
प्रदेश सचिव कमला गौतम के द्वारा दी गई जानकारी
मिड-डे मील यूनियन की प्रदेश सचिव कमला गौतम ने कहा कि, “स्कीम वर्कर सार्वजनिक कल्याण योजनाओं की रीढ़ हैं, लेकिन हमें न तो सम्मानजनक वेतन मिलता है और न ही कानूनी सुरक्षा। नए श्रम कानून हमारे अधिकारों को और कमजोर करेंगे।”एआईसीसीटीयू लखनऊ के संयुक्त सचिव रमेश शर्मा ने कहा, “यह राष्ट्रीय हड़ताल देशभर के मजदूरों के बढ़ते गुस्से का प्रतीक है। नीतियां बड़े पूंजीपतियों के हित में बन रही हैं, मजदूरों के लिए नहीं।”
संयुक्त सचिव राजीव गुप्ता के द्वारा दी गई जानकारी
आरवाईए उत्तर प्रदेश के संयुक्त सचिव राजीव गुप्ता ने कहा कि, “युवा बेरोजगारी चरम पर है। ग्रामीण रोजगार योजनाओं को मजबूत करने के बजाय उन्हें कमजोर किया जा रहा है और ऐसे व्यापार समझौते किए जा रहे हैं जो देशी रोजगार पर चोट करते हैं।”
ऐपवा लखनऊ की सहयोजक सरोजिनी बिष्ट के द्वारा दी गई जानकारी
ऐपवा लखनऊ की सहयोजक सरोजिनी बिष्ट ने कहा कि, “श्रम कानूनों के कमजोर होने का सबसे बड़ा असर महिलाओं पर पड़ता है। हम सुरक्षित रोजगार, समान वेतन और काम की गरिमा की मांग करते हैं।”कार्यक्रम का संचालन आइसा के शान्तम निधि ने किया। उन्होंने कहा कि, “जब रोजगार की गारंटी और श्रमिक अधिकारों पर हमला हो रहा हो, तब छात्र और मजदूरों की एकजुटता ही लोकतांत्रिक प्रतिरोध की असली ताकत है।प्रदर्शन शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से संपन्न हुआ। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो संघर्ष को और व्यापक बनाया जाएगा।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर