ममता और संघर्ष की अनोखी मिसाल: अयोध्या की सड़कों पर 'झोले' में दुनिया देख रही है यह मासूम
राम की नगरी अयोध्या से सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायल हो रहा है जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। जहाँ आधुनिक युग में बच्चों के लिए आलीशान पालने और स्ट्रोलर मौजूद हैं, वहीं अयोध्या की सड़कों पर एक माँ अपनी एक साल की बेटी को कपड़े के एक साधारण झोले में लेकर घूम रही है। यह महज एक सफर नहीं, बल्कि एक माँ के अटूट संघर्ष और ममता की वो दास्तां है, जो गरीबी की मार के आगे घुटने टेकने के बजाय लड़ना सि
ayodhya
6:06 PM, May 1, 2026
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आयोध्या में दिखी मां की अनोखी ममता सौ0
उत्तर प्रदेश। राम की नगरी अयोध्या से सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायल हो रहा है जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। जहाँ आधुनिक युग में बच्चों के लिए आलीशान पालने और स्ट्रोलर मौजूद हैं, वहीं अयोध्या की सड़कों पर एक माँ अपनी एक साल की बेटी को कपड़े के एक साधारण झोले में लेकर घूम रही है। यह महज एक सफर नहीं, बल्कि एक माँ के अटूट संघर्ष और ममता की वो दास्तां है, जो गरीबी की मार के आगे घुटने टेकने के बजाय लड़ना सिखाती है।
जानकारी के अनुसार, महिला अयोध्या के विभिन्न इलाकों में लोगों के घरों में साफ-सफाई और झाड़ू-पोछा का काम करती है। महिला के पति एक दुर्घटना में घायल हो गए थे, जिसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। एक साल की मासूम बच्ची को घर पर अकेला छोड़ना संभव नहीं था, इसलिए माँ ने ममता और काम के बीच एक अनोखा रास्ता निकाला। उसने एक झोला तैयार किया, जिसमें वह अपनी बेटी को बिठाकर कंधे पर टांग लेती है और एक घर से दूसरे घर काम के लिए निकल पड़ती है।
महिला अपने बच्चो को झोले में लेकर जाती हुई सौ0 bma7.in
पिछले कुछ दिनों से इस माँ-बेटी का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि, मासूम बच्ची अपनी माँ के कंधे पर लटके उस झोले में कितनी सहज और खुश है। वह दुनिया की परवाह किए बिना अपनी माँ के साथ इस अनोखे सफर का आनंद ले रही है। नेटिजन्स इस वीडियो को देखकर कह रहे हैं कि "माँ आखिर माँ होती है, वह अपने बच्चे को पालने के लिए कोई भी रास्ता निकाल लेती है।
यह तस्वीर समाज के उस हिस्से का आइना भी है, जहाँ आज भी एक बड़ा वर्ग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। पति की चोट और आर्थिक तंगी ने इस महिला को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया। लेकिन उसने अपनी ममता को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया। माँ का कहना है कि, वह पिछले एक साल से इसी तरह अपनी बेटी को साथ लेकर काम पर जा रही है।
जब सबने छोड़ा साथ तब सड़को पर निकली महिला सौ0 bma7.in
अयोध्या की यह 'झोले वाली माँ' आज उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी मुश्किलों से हार मान लेते हैं। यह खबर हमें याद दिलाती है कि, एक माँ की गोद सिर्फ सुकून की जगह नहीं, बल्कि संघर्ष का सबसे बड़ा सहारा भी होती है। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं से अब यह उम्मीद की जा रही है कि, वे इस परिवार की सुध लेंगे ताकि इस मासूम का भविष्य सुरक्षित हो सके।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर